RPF Constable Syllabus 2018 | RPF SI Syllabus 2018 |आरपीएफ कांस्टेबल पाठ्यक्रम 2018 | आरपीएफ एसआई पाठ्यक्रम 2018

आरपीएफ कांस्टेबल पाठ्यक्रम 2018 | आरपीएफ एसआई पाठ्यक्रम 2018
भारतीय रेलवे ने रेल गाड़ी की सुरक्षा के लिए रेलवे पुलिस फ़ोर्स में 8619 कांस्टेबल पदों और 1120 एस आई के पदों के आवेदन आमत्रित किया है. दोनों भर्ती के लिए सिलेबस एक ही है. 

सामान्य जागरूकता (50 अंक):
प्रश्नों  का उद्देश्य उनके आस-पास के माहौल के उम्मीदवार की सामान्य जागरूकता और वर्तमान घटनाओं के ज्ञान और रोजमर्रा के अवलोकन और अनुभवों के ऐसे मामलों की जांच करने के लिए समाज के लिए उनके आवेदन के बारे में सामान्य जागरूकता का परीक्षण करना होगा, जैसा किसी भी शिक्षित व्यक्ति से अपेक्षित किया जा सकता है। इस परीक्षा में भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति, भूगोल, अर्थशास्त्र, सामान्य राजनीति, भारतीय संविधान, खेल, सामान्य विज्ञान इत्यादि से संबंधित प्रश्न भी शामिल होंगे।

अंकगणितीय (35 अंक):
संख्या प्रणाली, पूर्ण संख्या, दशमलव और अंशों और संख्याओं, मौलिक अंकगणितीय परिचालन, प्रतिशत, अनुपात और अनुपात, औसत, ब्याज, लाभ और हानि, छूट, तालिका और ग्राफ का उपयोग, मासिक, समय और दूरी, अनुपात और अनुपात के बीच संबंधों पर प्रश्न अनुपात इत्यादि

सामान्य तर्क शक्ति(35 अंक):
समानताएं और मतभेदों, स्थानिक दृश्यता, स्थानिक अभिविन्यास, समस्या निवारण विश्लेषण, निर्णय, निर्णय लेने, दृश्य स्मृति, भेदभावपूर्ण अवलोकन, रिश्ते की अवधारणाएं, अंकगणितीय तर्क, मौखिक और आकृति वर्गीकरण, अंकगणितीय संख्या श्रृंखला, गैर-मौखिक सेवाएं, कोडिंग और प्रश्नों पर प्रश्न डिकोडिंग स्टेटमेंट निष्कर्ष, शब्दावली तर्क आदि

अभ्यर्थी को सभी सवालों के जवाब देने की आवश्यकता होगी और प्रत्येक सही उत्तर के लिए 1 अंक से सम्मानित किया जाएगा। प्रत्येक गलत उत्तर के लिए नकारात्मक अंक दिए जाएंगे। प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 1/3 अंक काट दिया जाएगा, प्रश्न के लिए कोई निशान नहीं दिया जाएगा या कटौती नहीं की जाएगी।

कुल अवधि 90 न्यूनतम प्रश्न संख्या: 120

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये