कश्मीरियों पर हमला करने को लेकर भिड़े दो आतंकी संगठन


श्रीनगर। अकसर कायरतापूर्ण हमले करने वाले आतंकी संगठन इन दिनों आपस में ही भिड़ गए हैं। कश्मीर घाटी में सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन इन दिनों टकराव के मूड में हैं। दरअसल, लश्कर-ए-तैयबा ने एक नया संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) बनाया है। हाल ही में हिजबुल मुजाहिदीन के टॉप कमांडर अब्बास शेख ने हिजबुल का साथ छोड़कर टीआरएफ का दामन थाम लिया है। यही कारण है कि टीआएफ और लश्कर अब हिजबुल मुजाहिदीन के निशाने पर हैं।
खूफिया सूत्रों के मुताबिक, हिजबुल मुजाहिदीन छोड़ने के बाद अब्बास शेख पूरी तरह से अंडरग्राउंड हो गया है। टीआरएफ में शामिल होने के बाद वह हिजबुल और सुरक्षाबलों से छिपता फिर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अब्बास दावा करता है कि उसके साथ 12 ऐक्टिव सदस्य हैं और कई सारे ग्राउंड वर्कर्स भी हैं। भारत में कोरोना संक्रमित भेजने की फिराक में पाकिस्तानकोरोना वायरस के संक्रमण से लगभग तबाही की तरफ आगे बढ़ रहा पाकिस्तान अब अपने संक्रमित लोगों को कश्मीर में दाखिल करवाने की कोशिश में लगा है। भारतीय खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिला है कि पीओके में आतंकवादियों के अलावा बड़ी संख्या में कोरोना वायरस के संक्रमित भी कश्मीर में घुसने की फिराक में लगे हुए हैं। इनका मकसद घाटी में संक्रमण को फैलाकर दहशत पैदा करना है। अब्बास शेख के बारे में टीआरएफ ने भी बयान जारी किया है। इस्लामिक जिहादी लोगो और 'रेजिस्टेंट टिल विक्ट्री' वाली पंचलाइन के साथ एक लेटर हेड पर टीआरएफ ने कहा है, 'कुछ दिन पहले ही हमने हिजबुल मुजाहिदीन को चेतावनी दी थी कि वह कश्मीर पुलिसकर्मियों और नागरिकों को मारना बंद करे लेकिन उसने शोपियां से जम्मू-कश्मीर के एक पुलिसकर्मी का अपहरण कर लिया।'
टीआरएफ ने आगे लिखा है, 'हिजबुल मुजाहिदीन को समझना चाहिए कि हमारी लड़ाई भारतीय सुरक्षाबलों और उसके कब्जे से है, कश्मीरियों से नहीं। कश्मीरी हमारे अपने हैं और हम बिना उनके समर्थन के सुरक्षाबलों के खिलाफ नहीं लड़ सकते हैं। हमने सोचा था कि हम साथ लड़ेंगे लेकिन यह हमारी सबसे बड़ी भूल थी।' बयान में टीआरएफ ने आगे कहा है, 'कमांडर अब्बास शेख भाई ने हिजबुल का साथ इसीलिए छोड़ा कि वह कश्मीरियों को मारने से सहमत नहीं हैं। अब वह हमारे साथ हैं और हम हर उस शख्स के खिलाफ लड़ेंगे,जो किसी भी कश्मीर को नुकसान पहुंचाएगा। यह हिजबुल को अंतिम चेतावनी है। हमें मजबूर मत करो कि हम सख्त ऐक्शन लें। इसके बाद कोई चेतावनी नहीं, सिर्फ ऐक्शन होगा।'

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