कोरोनाकाल में धर्माचार्यों ने मौत के डर से मंदिरों के पट किए बंद : जगवीर सिंह तोमर


ग्वालियर। देश में तेजी से फैली कोरोना महामारी के बीच संत, महात्मा, पुजारी, शंकराचार्यों पादरी, मौलवी सहित सभी धर्माचार्यों ने मौत के भय से भगवान के पट बंद कर दिए। इन सभी ने कोरोना से डरे भक्तों को कोई सांत्वना संदेश न देते हुए उन्हें और ज्यादा डराने का कार्य किया। बालाजी सरकार के चरणसेवक जगवीर सिंह तोमर बेहद आक्रोशित नजर आए।
उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां इन सभी धर्माचार्यों ने मौत के भय से खुद को भगवान से अलग कर घरों में कैद कर लिया। वहीं मैंने पहले लॉकडाउन की अवधि में मंदिर में अखण्ड रामायण पाठ कराकर चौबीस घंटे खोला। दूसरे लॉकडाउन 15 अप्रैल से प्रतिदिन 1101 हनुमान चालीसा के पाठ सेवकों के साथ किये। तीसरे लॉकडाउन 4 मई से प्रतिदिन रात्री 8 बजे से यज्ञ (हवन) प्रारंभ कराया। जिसमें शहर भर से क्रमानुसार भक्तगणों ने आकर हवन में भाग लिया। हवन यज्ञ निरंतर जारी है। इसी दौरान भक्तों की इच्छा पर 18 मई से 8 जून तक हवन के साथ अखण्ड रामायण का पाठ भी कराया। यह सभी कार्यक्रम भारत से कोरोना संकट महामारी के समूल नाश के लिए किये गये।
श्री तोमर ने कहा कि जब तक मेदरे शरीर में सांस है तब तक तब तक मैं आमजन का अपने स्तर से प्रभु के भरोसे आत्मशक्ति, मनोबल, हिम्मत, हौसला बढ़ाकर व उनका ईश्वर के प्रति प्रेम व विश्वास बढ़ाकर उनको खुशहाल देखने की हसरत हमेशा बनाये रखूंगा। कभी भी किसी भी मुसीबत में मंदिर के गेट (पट) बंद नहीं करूंगा। ना ही पूजा-पाठ बंद करूंगा। ना ही घंटे बांधूंगा चाहे मुझे मौत ही क्यों न आ जाये। इसी के साथ उन्होंने कहा कि मैं सभी धर्माचार्यों से प्रार्थना करता हूं कि जनमानस आपको भगवान की तरह पूजता है सम्मान करता है धन देता उसी की मान्यता से आप किसी धार्मिक पद पर हैं। उन्ही की दक्षिणा से आप लग्जरी गाड़ियों में घूमते हैं एसी का आनंद उठाते हैं। फूल मालाओं से लदे रहते हैं। इसलिए आप जनमानस को डराएं नहीं बल्कि उन्हें हिम्मता और हौसला दें जिससे वह जिंदगी में आने वाली हर मुसीबत का बहादुरी से सामना करें। अगर आपको मौत से डर लगता है तो जनमानस के बीच न रहकर पंचवटी जैसे स्थानर पर जनउत्थान और कल्याण के लिए साधना करें।

इन प्रश्नों का जवाब दें धर्माचार्य
1. अध्यात्म (धर्म) ईश्वर बड़ा है या विज्ञान?
2. मंदिर आस्था और विश्वास का प्रतीक है या नहीं?
3. जब इंसान सभी तरह से हार व निराश हो जाता है तब वह कहां जाता है और उसे कहां जाना चाहिए?
4. डॉक्टर इंसानियत के पहले डॉक्टर हैं या दूसरे?
5. क्या अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर के इस तरह की कोई परेशानी आ जाने पर उसके पट बंद कर दिये जाएंगे?
6. जब मुसीबत के समय ही आस्था, विश्वास के धर्म स्थल मंदिरों में मथ्था टेकने, प्रार्थना करने नहीं जा सकते तो मंदिरों का औचित्य ही क्या है? मंदिर आखिर बनाये ही क्यों जाते हैं?
7. तुलसी कृत रामयण रामचरित मानस के अयोध्या काण्ड के पेज नंबर 171 पर दोहे में लिखे शब्द "हानि लाभ जीवन मरण यश अपयश विधि हाथ" क्या आप इस बात से असहमत हैं? क्या आप रामायण को इंसानियत के मार्ग दिर्शत ग्रंथ के रूप में नहीं मानते हैं?
8. देशभर के न्यायालयों में गीता की कसम झूठी खायी जाती है क्या? गीता में लिखा है जो करता हूं मैं करता हूं, तुम क्यों व्यर्थ चिंता करते हो। इस बात से आप असहम हैं क्या?
9. क्या हमारे वेदों में पुराणों में भागवत में रामायण में गीता में लिखा है कि मुसीबत के समय मौत के भय से सबकुछ भूल जाओ। आपने हम इंसानों को कोई शिक्षा कोई संदेश क्यों नहीं दिया?

अयोध्या में राम मंदिर बनने तक जारी रहेगा हवन यज्ञ
श्री जगवीर सिंह तोमर ने बताया कि संकट मोचन मंदिर में तीसरे लॉकडाउन से कोरोना खत्म करने के लिए शुरू हुआ हवन यज्ञ अब अयोध्या में रामलला की स्थपना होने तक जारी रहगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या में मंदिर बनना ऐतिहासिक घटना है इसलिए प्रभु श्रीराम की अयोध्या में स्थापना से पहले देश-दुनिया में बड़ी हलचल मचना स्वाभाविक है। इसलिए देश में शांति और प्रभु श्रीराम की भक्ति के लिए बालाजी सरकार (हनुमान जी महाराज) से प्रार्थना करने एवं उन्हें खुश करने के लिए मंदिर में अनिश्चतकाल के लिए नियमित रूप से हवन चल रहा है।

कोरोनावीरों का हुआ सम्मान
कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डालकर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों का संकट मोचन (बालाजी) मंदिर में सम्मान किया गया। सम्मानित होने वाले पत्रकारों में हरीश दुबे, जावेद खान, राहुल शर्मा, राम किशन कटारे, अंशुल वाजपेयी, दीपक सविता, विकास पांडे, अनिल शर्मा, मनीष शर्मा, लोकेंद्र भार्गव, दीपक श्रीवास्तव, राजेंद्र ठाकुर, प्रेम बरोनिया, विभावसु तिवारी, धर्मेन्द्र तोमर, संजय भटनागर, नरेंद्र परिहार, अजय मिश्रा, अभिषेक बरोनिया सहित 40 से अधिक पत्रकार शामिल रहे।

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