जो देश अपने शहीदों को भूल जाता है, वह अपना अस्तित्व खो देता है : पवैया

ग्वालियर। वीरांगना लक्ष्मीबाई बलिदान मेले के दूसरे दिन सुबह पुष्पांजलि के उपरांत लक्ष्मीबाई समाधि के सामने प्रांगण में श्रद्धांजलि उपवास एवं प्रार्थना सभा हुई। 1857 के बलिदानियों और भारत चीन सीमा पर शहीद हुए जवानों के लिए 2 मिनट श्रद्धांजलि देकर उपवास शुरू किया गया। इस मौके पर मेले के संस्थापक अध्यक्ष और पूर्व मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि 18 जून 1858 में जिस भूमि के लिए अनगिनत वीरांगनाओं ने अपना लहू दे दिया, हम उस लाल मिट्टी को चंदन मानकर माथे पर लगाते हैं, क्योंकि जो देश अपने शहीदों को भूल जाता है और इतिहास की जड़ों से कट जाता है ऐसा देश अपना अस्तित्व खो देता हैं। वीरांगना के बलिदान के बदले हमारे पास सिर्फ आंसू की दो बूंदे और भावांजलि हो सकती है। कोरोना संक्रमण के कारण इस बार सीमित कार्यक्रमों के तहत बलिदान मेले को मनाया गया। बुधवार को झाँसी दुर्ग से शहीद ज्योति यात्रा ग्वालियर लाई गई थी। गुरुवार सुबह 8 से दोपहर 12 बजे तक के लिए बलिदान मेला संस्थापक अध्यक्ष और पूर्व मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया, ग्वालियर सांसद श्री विवेक नारायण शेजवलकर, श्री यशवंत इंदापुरकर, रामकृष्ण आश्रम के पूज्यसंत सुदीप्तानंद जी महाराज, महंत श्री रामभजन दास जी महाराज, भाजपा जिला अध्यक्ष कमल मखीजानी, डॉ सतीश सिंह सिकरवार, पूर्व सभापति श्री राकेश माहौर, लालजी जादौन, गंगाराम बघेल, पूर्व जीडीए अध्यक्ष श्री रविंद्र सिंह राजपूत, विद्यार्थी परिषद के श्री नितेश शर्मा, संघ के प्रांतकार्यवाह श्री सुरेन्द्र मिश्रा, अजय बंसल, बजरंग दल के श्री विश्ववर्धन भट्ट, भाजपा जिला उपाध्यक्ष कनवर मंगलानी, जिलामंत्री राकेश खुरासिया, देवेंद्र पवैया, डॉ हरिमोहन पुरोहित, जागेश्वर सिंह भदौरिया, आर के गुप्ता, प्रयाग तोमर, जगत कौरव, संतोष भारती, युवामोर्चा जिला महामंत्री हरीश यादव, दयाराम पाल सहित भाजपा कार्यकर्ता, गणमान्य लोग मौन श्रद्धांजलि सभा में बैठे और चीन की सीमा पर शहीद हुए सैनिकों को भी श्रद्धांजलि दी।


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