खिसियानी बिल्ली खम्बा तो नोचेगी ही : नरोत्तम मिश्रा


ग्वालियर। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के बयान पर तंज कसा है। गृह मंत्री ने कमल नाथ के सिंधिया समर्थक जयचंदों के सैटल हो जाने को लेकर की गई टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा है कि "खिसियानी बिल्ली खम्बा तो नोचेगी ही"। वहीं पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य ने कांग्रेस को हिंदुस्तान का सबसे बड़ा दलित विरोधी दल करार देते हुए कहा है कि कांग्रेस ने राजा को राज्यसभा भेज दिया रंक को नहीं भेजा। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रविवार रात प्रदेश के गृह मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा ग्वालियर प्रवास पर पहुचे। यहां उन्होंने पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता लाल सिंह आर्य से उनके दीनदयाल नगर स्थित घर पर पहुचकर बंद कमरे में मुलाकात की। इससे पहले गृह मंत्री की आगवानी पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य, जिलाध्यक्ष कमल माखीजानी एवं प्रदेश प्रवक्ता आशीष अग्रवाल ने की। इस मुलाकात को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि लाल सिंह आर्य पार्टी से नाराज हैं लिहाजा उन्हें मनाने नरोत्तम मिश्रा उनसे मिलने पहुचे हैं। लेकिन लाल सिंह आर्य ने मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में साफ कर दिया कि वे कतई नाराज नहीं हैं। क्योंकि पार्टी ने उन्हें बहुत कुछ दिया है। उन्होंने कभी पार्षद बनने की नहीं सोची थी, पार्टी ने एक मजदूर के बेटे को तीन-तीन बार विधायक और फिर मंत्री बनाया। पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य ने कांग्रेस द्वारा भाजपा को दलित विरोधी पार्टी बताने के आरोप पर सवाल उठाया। उन्होंने तात्कालिक उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने राजा को राज्यसभा भेज दिया, रंक को नहीं। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने संविधान निर्माता बाबा साहब अंबेडकर को एक नहीं दो चुनाव हरवाये, उनसे जुड़े पांच स्थान हैं जिन्हें राष्ट्रीय स्मारक नहीं बनाया, भाजपा ने बनाया। भाजपा ने हमेशा सामाजिक समरसता का पाठ पढ़ाया है, इसलिए हिंदुस्तान में अगर दलित विरोधी कोई दल है तो वो कांग्रेस है। वहीं लाल सिंह आर्य से मुलाकात के बाद नरोत्तम मिश्रा ने भी पत्रकारों से चर्चा की। कमल नाथ के सिंधिया समर्थक जयचंदों के भाजपा में सेटल हो जाने की टिप्पणी पर बेहद सधे हुए लहजे में तंज कसते हुए पलटवार किया। उन्होंने कहा कि खिसियानी बिल्ली खम्बा तो नोचेगी ही। मैनेजमेंट गुरु कहलाते थे, मैनेजमेंट फैल हो गया, सरकार को नहीं चला पाए, उनके अपने घर में फूट पड़ गई, अपनी पार्टी और अपने परिवार को नहीं संभाल पाए, अब क्या कहेंगे वो। इससे पहले पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य से मुलाकात के सवाल पर उन्होंने कहा कि ग्वालियर उनका घर है और लाल सिंह आर्य से उनकी मुलाकात होती रहती है, ये सामान्य बात है। एक अन्य सवाल के जबाब में उन्होंने कहा कि पुलिस महकमे में अधिकारियों को पदनाम दिए जाने का मामला विचाराधीन है। लेकिन कभी कोई घोषणा नहीं की। बहरहाल भारतीय जनता पार्टी में रूठे नेताओं को मनाने का सिलसिला जारी है। जिम्मा शिवराज सरकार के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को सौंपा है सो बखूबी संभाल रहे हैं। लगातार तीसरे रविवार को नरोत्तम मिश्रा ग्वालियर पहुचे और पार्टी से नाराज माने जा रहे पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य से उनके निज निवास पर पहुचकर मुलाकात की। हालांकि दोनों ही नेताओं ने रूठने-मनाने जैसी बातों को खारिज किया है। लेकिन लगातार नरोत्तम की ग्वालियर यात्राएं और भाजपा के उन वरिष्ठ नेताओं से मुलाकातें, जिन्हें नाराज माना जा रहा है पार्टी में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है इस बात की चुगली जरूर कर रहा है।


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