कोरोना से प्रभावित हुई कोरियर सेवाएं, दो दिन की जगह 15 दिन में पहुंच रहा पार्सल


ग्वालियर। कोरोना के चलते देश में लगाए गए लॉकडाउन के बाद से ही देश की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हुआ है. लॉकडाउन की वजह से देश से जुड़ी लगभग-लगभग सभी सुविधाएं प्रभावित हुई. कुछ ऐसा ही हाल कोरियर सेवा का भी हुआ, जिसका लॉकडाउन पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिला.
लॉकडाउन में रेल, हवाई सेवाएं और सड़क परिवहन बंद होने से कोरियर सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुईं. वर्तमान में स्थिति यह है कि जरूरी पार्सल को भेजने के लिए ट्रकों का सहारा भी लेना पड़ रहा है. क्योंकि पहले जो पार्सल दो दिन में पहुंच जाता था. वह अब आठ से दस दिन में पहुंच रहा है. इसके अलावा कोरोना के चलते जिन क्षेत्रों को कंटेनमेंट जोन बनाया गया है वहां पार्सल पहुंचाना तो मुश्किल काम है.
देश की सबसे बड़ी पार्सल और कोरियर सेवा डाक विभाग संचालित करता है और डाक विभाग के पार्सल रेल, हवाई जहाज और सड़क परिवहन से ही जाते हैं. लेकिन लॉकडाउन में सब बंद था. ऐसे में कोरियर सेवा से जो राजस्व मिलता था, उसमें भी 50 से 60 फ़ीसदी की कमी आ चुकी है. केवल सरकारी ही नहीं, बल्कि प्राईवेट कोरियर कंपनियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है.
ग्वालियर के मुख्य डाकघर के अधीक्षक एसके ठाकरे कहते हैं कि लॉकडाउन से पहले इंडिया पोस्ट ग्वालियर से अलग-अलग शहरों में 6 ट्रेनों से पार्सल भेजता था. लेकिन वे ट्रेनें बंद हैं. इसलिए ट्रकों या बसों का इस्तेमाल किया जा रहा है. जिससे पार्सल टाइम से नहीं पहुंच पा रहा. अधीक्षक ठाकरे का कहना है इस समय अधिकांश लोग दस्तावेज भेजने के लिए मेल, व्हाट्सएप का इस्तेमाल कर रहे हैं, अगर कोई दस्तावेज मैनुअली मांगा जाता है तो उसे ही कोरियर किया जा रहा है. जो इलाके हॉटस्पॉट घोषित हैं उनमें कोरियर सेवा देने वाले कर्मचारियों को प्रवेश नहीं मिल रहा है. ऐसे में इन इलाकों में कोरियर पहुंचाना असंभव है. उनका कहना है कि अभी फिलहाल कोरियर सेवा को पहले जैसे संचालित करना कठिन हो रहा है. क्योंकि अभी ट्रेनों की संख्या काफी कम है साथ ही बस संचालित नहीं हो रही है. जिससे यह परेशानी अभी आगे भी रह सकती है.
एक रिपोर्ट के अनुसार सरकारी और निजी कंपनियां अलग-अलग प्रकार की पार्सल सेवा के जरिए हर महीने करीब 20 करोड़ रुपए का कारोबार कर रहीं थीं. लेकिन लॉकडाउन के बाद से ही सरकारी और निजी कोरियर सेवाओं के प्रभावित होने से राजस्व विभाग को 70 फ़ीसदी तक नुकसान उठाना पड़ रहा है. जिसका कहीं न कहीं सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर ही पड़ रहा है.



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