कोरोना काल में लगातार खुला रहा संकट मोचन हनुमान मंदिर, होते रहे कार्यक्रम


प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में लगातार छपने के बाद प्रशासन का कार्रवाई न करने एवं किसी भक्त संक्रमित न होने से प्रमाणित हुई हनुमान जी शक्ति


ग्वालियर। गोलपाड़ा किलागेट पर स्थिति संकट मोचन हनुमान (बालाजी) मंदिर में कोरोना काल यानी 22 मार्च जनता कर्फ्यू के दिन से शुरू हुए कार्यक्रम आज दिनांक अनवरत जारी हैं। जहां एक तरफ देशभर के मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर और गुरुद्वारों के पट बंद कर दिये गये। वहीं बालाजी सरकार के चरणसेवक जगवीर सिंह तोमर ने संकट मोचन मंदिर जो सुबह-शाम खुला था उसे 24 घंटे खोलना शुरू कर दिया। मंदिर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का लगातार मीडिया कवरेज भी हुआ। यही नहीं मंदिर में मनाई गई गुरुपूर्णिमा के निमंत्रण पत्र तो पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों के साथ नेताओं और व्यापारियों को भी दिये गये। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। मंदिर में पहले लॉकडाउन के दौरान अखंड रामायण का पाठ किया गया। दूसरे लॉकडाउन में 1101 बार हनुमान चालीसा के पाठ हुए। तीसरे लॉकडाउन से शुरू हुआ हवन-यज्ञ आज दिनांक तक जारी है। यह यज्ञ अयोध्या में रामलाला के विराजमान होने तक लारी रहेगा।
चरणसेवक जगवीर सिंह तोमर ने बताया कि कोरोना महामारी देश में इसलिए ज्यादा फैली क्योंकि मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर और गुरुद्वार बंद करवा दिए गए। अगर इन्हें बंद नहीं किया जाता तो ईश्वरी शक्ति अपने भक्तों की फरियादी सुनती और इसे इतना नहीं बड़ने देती। हालांकि यह ईश्वर शक्ति का ही प्रताप है कि भारत में नहीं एशिया में कोरोना से मौतों का आंकड़ा काफी कम है। उन्होंने कहा कि संकट मोचन हनुमान (बालाजी) मंदिर जो गोलपाड़ा में स्थिति है इसके पट 24 घंटे खुले रहे और भक्तों ने मंदिर पहुंचकर बालाजी सरकार से इस बीमारी से बचाने की फरियादी की। उदाहरण सबके सामने है। मंदिर में आने वाले भक्तों को तो छोड़िए उनके नाते-रिश्तेदारों तक को कोराना नहीं हुआ। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अगर देशभर के धर्मस्थल खोले जाते तो इस बीमारी का क्या हश्र होता।
श्री तोमर ने कहा कि जिस तरह धर्माचार्यों ने धर्मस्थल बंद कर भक्तों को प्रशासन का भय दिखाया वह भी मेरे गले नहीं उतरा। क्योंकि संकट मोचन में होने वाले कार्यक्रमों का मीडिया द्वारा लगातार कवरेज किया गया। यहां इन चार महीनों में हजारों भक्तों ने बालाजी सरकार के दर्शन किये एवं प्रसाद ग्रहण किया। यहां आरती भी हुई, घंटानाद भी हुआ। अखंड रामायण का पाठ हुआ तो हनुमान चालीसा भी लाउडस्पीकर पर पढ़े गए। अनिश्चतकालीन चल रहे हवन में भी मंत्रों का उच्चारण लाउड स्पीकर पर ही किया जाता है। यही नहीं पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों को निमंत्रण पत्र देकर उन्हें आमंत्रित भी किया गया। उसके बावजूद किसी प्रकार की कार्रवाई न होना क्या हनुमान जी महाराज की शक्ति का सुबूत नहीं है। क्या आपने या हमने इस कार्यवाई को रुकवाया? जब प्रशासन ने आदेश दिया कि गुरुपूर्णिमा सुबह 10 बजे तक मनाई जाये तो मंदिर की तरफ दिये गये निमंत्रण पत्रों में स्पष्ट लिखा हुआ था कि दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। और किया भी किया रात 10 बजे के बाद तक भंडारा और गुरु दर्शनों का कार्यक्रम जारी रहा। मंदिर में हर मंगलवार और शानिवार को चोला चढ़ाया जाता है। सवामणि का भोग लगता है, फूल बंगला सजाया जाता है। आरती होती है, भांडारे का आयोजन किया जाता है जिसमें शहरभर से श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। कहने का तात्पर्य है कि इस मंदिर इस स्थान ने यह प्रमाणित कर दिया है कि आज भी हनुमान जी महाराज जो चाहे वह कर सकते हैं अगर इसी तरह हिंदुस्तान भर के हनुमान मंदिरों के पुजारी एवं चरण सेवकों ने मंदिरों को पूर्ण आस्था और विश्वास से खोला होता तो हनुमान जी महाराज अपने श्रद्धालुओं को भक्तों को कोरोना संक्रमण से दूर रखते और भारत में कोरोना कम फैलता ऐसा ऐसे स्थान के विश्वास और आस्था से प्रमाणित हो गया है।

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