फलदार पेड लगाने की शर्त पर दी आरोपी को जमानत

ग्वालियर। मारपीट, बलवा और जान से मारने की धमकी देने के मामले में आरोपी को हाईकोर्ट ने जिस प्राइमरी स्कूल में वह पढा है वहां दो फलदार पेड लगाए जाने की शर्त पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। आरोपी को हर तीन माह में इन पौधों की रिपोर्ट न्यायालय में पेश करना होगी। न्यायालय ने कहा कि वर्तमान में मानव अस्तित्व के आवश्यक अंग के रूप में दया सेवा प्रेम एवं करूणा की प्रकृति को विकसित करने की आवश्यकता है। यह मानवजीवन की मूलभूत प्रवृत्तियां है और मानव अस्तित्व को बनाए रखने के लिए इनका पुनर्जीवित होना आवश्यक है। यह प्रयास केवल एक वृक्ष के रोपण का प्रश्न नहीं है बल्कि एक विचार के अंकुरण का है। न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक ने आरोपी सतीश धाकड के आवेदन को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिए हैं। न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक ने किस प्रकार पेड लगाना है एवं उनकी किस प्रकार से सुरक्षा करना है इस संबंध में सभी दिशा निर्देश हिंदी में दिए है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि न्यायालय द्वारा यह निर्देश एक परीक्षण प्रकरण के तौर पर दिए गए हैं ताकि हिंसा और बुराई के विचार का प्रतिकार, सृजन एवं प्रकृति के एकाकार होने के माध्यम से सामंजस्य स्थापित किया जा सके। न्यायालय ने कहा कि आरोपी को पेडों की सुरक्षा के संपूर्ण प्रबंध करने होंगे। न्यायालय ने कहा कि आरोपी का यह कर्तव्य है कि वह न केवल पौधों को लगाए बल्कि उन्हें पोषित भी करे। वृक्षोरोपण के साथ वृक्षपोषण भी जरूरी है। न्यायालय ने कहा कि जो पौधे लगाए जाएंगे वे 6 से 8 फीट के होना चाहिए ताकि वे जल्दी विकसित हो सकें। आरोपी को आदेश का पालन कर तीस दिन में न्यायालय में रिपोर्ट पेश करनी होगी। न्यायालय ने कहा कि वृक्षों की प्रगति पर निगरानी रखना विचारण न्यायालय का कर्तव्य है, क्योंकि पर्यावरण क्षरण के कारण मानव अस्तित्व दांव पर है और न्यायालय आरोपी द्वारा दिखाई गई किसी भी लापरवाही को नजरअंदाज नहीं कर सकता। वृक्षारोपण में या पेडों की देखभाल में आवेदक की कोई भी चूक उसे जमानत का लाभ लेने से वंचित कर सकती है। न्यायालय ने आवेदक को अपनी पसंद के स्थान पर पेड रोपने की स्वतंत्रता भी दी है।


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