खुद सड़क पर उतरे कलेक्टर ने बिना मास्क के शाहरुख खान को पकड़ा, तीन दिन के लिये बनाया कोरोना वॉलेन्टियर


ग्वालियर। कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम के लिये सभी को मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है। बिना मास्क के घूमते पाए जाने पर कोरोना वॉलेन्टियर के रूप में कार्य कराया जायेगा। इसके आदेश कलेक्टर श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह द्वारा जारी किए गए हैं। मास्क पहनकर संक्रमण की रोकथाम करने का दायित्व शहर के हर नागरिक का है। कलेक्टर श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह सोमवार को शहर के भ्रमण पर निकले तो एसपी ऑफिस के सामने शाहरूख खान पुत्र स्व. हबीब खान बिना मास्क पहने अपनी बाइक पर जाता हुआ मिला। उन्होंने तत्काल गाड़ी रोककर शाहरूख को रोका और बिना मास्क के घूमने का कारण पूछा। शाहरूख द्वारा कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। कलेक्टर ने एसडीएम लश्कर श्री सी बी प्रसाद को निर्देशित किया कि श्री शाहरूख को तीन दिन तक अपने साथ कोरोना वॉलेन्टियर के रूप में लगाएं। कलेक्टर के निर्देश पर श्री सी बी प्रसाद ने श्री शाहरूख खान को अपने साथ गाड़ी में बिठाया और आगामी तीन दिन तक कोरोना वॉलेन्टियर के रूप में कार्य करने के लिये निर्देशित किया है। इसके साथ ही कलेक्टर ने हाईकोर्ट पर धमेन्द्र यादव पुत्र श्री बाबूलाल यादव को भी बिना मास्क के घूमते पाए जाने पर रोका और मास्क न पहनने के संबंध में जानकारी ली। श्री धमेन्द्र यादव द्वारा बताया गया कि वह सेंवढा जिला दतिया का रहने वाला है और अपने घर जा रहा है। कलेक्टर ने तत्काल जुर्माना कर राशि वसूल करने के निर्देश एसडीएम को दिए। जुर्माना वसूल करने के साथ-साथ समझाइश दी और तत्काल मास्क पहनवाकर उसे रवाना किया। कलेक्टर श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने जिले के सभी इंसीडेंट कमांडरों को निर्देशित किया है कि वे प्रतिदिन अपने-अपने क्षेत्र में भ्रमण कर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित कराएं। इसके साथ ही बिना मास्क के घूमते पाए जाने पर जुर्माना करने के साथ-साथ ऐसे लोगों को कोरोना वॉलेन्टियर बनाकर कम से कम तीन दिन अपने साथ लगाकर कार्य कराएं। ऐसे लोगों को कोरोना वॉलेन्टियर के रूप में अन्य स्थानों पर भी तैनात किया जा सकता है। कलेक्टर ने जिले के निवासियों से अपील की है कि नोवेल कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम में अपना पूरा सहयोग दें। कोई भी व्यक्ति बिना मास्क पहने घर से बाहर न निकले। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित करें। बिना काम के कोई भी व्यक्ति घर से बाहर न निकले। उन्होंने कहा कि कोरोना से बचाव का एक मात्र उपाय सावधानी है।


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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये