जेईई और नीट परीक्षा को 150 शिक्षाविदों का PM को पत्र, देरी हुई तो छात्रों का भविष्य होगा प्रभावित


नई दिल्ली। जेईई और नीट परीक्षा को लेकर सरकार और विपक्ष में जारी खींचतान रुकने का नाम नहीं ले रहा है। परीक्षा के पक्ष में देश और विदेश के 150 से ज्यादा शिक्षाविदों ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है। इन शिक्षाविदों ने पत्र में कहा है कि मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई (मुख्य) और नीट में यदि और देरी हुई तो छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा। इतना ही नहीं, इन शिक्षाविदों ने परीक्षा को लेकर विरोध कर रहे लोगों को भी आड़े हाथों लिया है।
विपक्ष के विरोध पर शिक्षाविदों ने साधा निशाना
शिक्षाविदों ने कहा कि कुछ लोग अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए छात्रों के भविष्य के साथ खेलने की कोशिश कर रहे हैं। युवा और छात्र राष्ट्र का भविष्य हैं लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण, उनके करियर पर अनिश्चितताओं के बादल छा गए हैं। प्रवेश और कक्षाओं के बारे में बहुत सारी आशंकाएं हैं जिन्हें जल्द से जल्द हल करने की आवश्यकता है।
...तो कीमती वर्ष बर्बाद हो जाएगा
पत्र में कहा गया है कि हर साल की तरह इस साल भी लाखों छात्रों ने अपनी कक्षा 12 की परीक्षाएं दी हैं और अब प्रवेश परीक्षाओं का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। सरकार ने जेईई (मुख्य) और नीट की तारीखों की घोषणा की है ... परीक्षा आयोजित करने में किसी भी तरह की देरी से छात्रों का कीमती वर्ष बर्बाद हो जाएगा। हमारे युवाओं और छात्रों के सपनों और भविष्य के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता है। हालांकि, कुछ लोग बस अपने राजनीतिक एजेंडे को चलाने और सरकार का विरोध करने के लिए हमारे छात्रों के भविष्य के साथ खेलने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत और विदेशों के शिक्षाविद शामिल
हस्ताक्षरकर्ताओं में दिल्ली विश्वविद्यालय, इग्नू, लखनऊ विश्वविद्यालय, जेएनयू, बीएचयू, आईआईटी दिल्ली और लंदन विश्वविद्यालय, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ यरुशलम और इजराइल के बेन गुरियन विश्वविद्यालय के भारतीय शिक्षाविद शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हम मानते हैं कि केंद्र सरकार पूरी सावधानी बरतते हुए जेईई और नीट परीक्षाएं आयोजित कर लेगी, ताकि छात्रों के भविष्य का ध्यान रखा जा सके और 2020-21 के लिए अकादमिक कैलेंडर तैयार किया जा सके।
विपक्ष की बैठक में कोर्ट जाने का फैसला
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ डिजिटल बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि इन परीक्षाओं को रोकने के लिए राज्यों को उच्चतम न्यायालय का रुख करना चाहिए। हालांकि झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता हेमंत सोरेन ने कहा कि न्यायालय जाने से पहले मुख्यमंत्रियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर परीक्षाओं को टालने की मांग करनी चाहिए।

टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रदेश में मजदूर कमीशन बनेगा, छोटे काम करने वालों को मिलेंगे 10 हजार रुपए