अब मध्य प्रदेश कांग्रेस में पीढ़ी परिवर्तन की तैयारी


भोपाल। कांग्रेस में युवा नेतृत्व को लेकर चल रही रस्साकशी ने नीति नियंताओं को सजग कर दिया है। चार दशक से पार्टी का चेहरा बने कद्दावर नेता भी अब बदलाव की बयार महसूस करने लगे हैं। विधानसभा की 27 सीटों पर निकट भविष्य में चुनाव होने हैं, लेकिन सरकार गंवा चुकी कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य मिशन 2023 है, इसलिए पार्टी पीढ़ी परिवर्तन की तैयारी कर रही है। अब युवा चेहरों पर दारोमदार डाले जाने को लेकर मंथन शुरू हो गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया व सुरेश पचौरी, नौ बार के विधायक डॉ. गोविंद सिंह समेत पहली पन्ति के अधिकांश नेता 70 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं।
चार दशक से कांग्रेस की राजनीति में इन्हीं का वर्चस्व चल रहा है। हालांकि युवा कंधों पर पार्टी संभालने की जिम्मेदारी बीच-बीच में जरूर डाली गई, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद चुनौती और बढ़ गई है। पार्टी हाईकमान ने भी मध्य प्रदेश में युवा चेहरों को आगे लाने की जरूरत महसूस की है। सूत्रों का कहना है कि राजस्थान की स्थिति से सबक लेते हुए युवा नेताओं को आगे करने के संकेत दिए जा चुके हैं।

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