हम जनता के सेवक हैं, कुर्सी के नहीं : ज्योतिरादित्य सिंधिया


उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए वरिष्ठ नेता श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मैं अपनी दादी और पिता की तरह जनता का सेवक हूं, कुर्सी का सेवक नहीं। यदि में मैं कुर्सी का सेवक होता, तो जब कमलनाथ थी, दिग्विजय जी ने मुझे डिप्टी सीएम बनने का प्रस्ताव दिया था, तो मैं स्वीकार कर लेता। लेकिन मुझे पता था कि सरकार में जो लोग बैठे हैं, वो प्रदेश का क्या हश्र करने वाले हैं और उसका भार मैं अपने ऊपर नहीं लेना चाहता था। श्री सिंधिया ने कहा कि इतिहास गवाह है, ग्वालियर अंचल में कभी कांग्रेस को इतनी सीटें नहीं मिलीं। अगर 5-6 सीटें भी कम हो जातीं, तो 15 महीने पहले ही भाजपा की सरकार बन जाती। हमें आशा थी कि कांग्रेस की सरकार विकास करेगी, सभी के लिए काम करेगी। लेकिन कांग्रेस की इस सरकार ने किया क्या? मंदसौर में किसानों का दो लाख तक का कर्ज 11 दिनों में माफी करने और न होने की स्थिति में मुख्यमंत्री बदलने का वादा किया, लेकिन 11 महीने बाद भी कर्जमाफी नहीं हुई। कन्याओं के विवाह हो गए, बच्चे हो गए, लेकिन 51 हजार रुपये नहीं मिले। युवाओं को भत्ता नहीं मिला। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री जी ने तो लोगों को कोरोना से बचाने के लिए देश में लॉकडाउन लगाया, लेकिन कमलनाथ ने साल पहले ही वल्लभभवन को जनता के लिए लॉक कर दिया था। सिर्फ ठेकेदार और व्यापारी ही जा सकते थे। मंत्रियों, विधायकों के लिए मुख्यमंत्री के पास समय नहीं था। कांग्रेस ने वल्लभ भवन को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया था। श्री सिंधिया ने कहा कि कांग्रेस के लोग अब हम पर आरोप लगाते हैं, लेकिन पिछले 15 महीनों में इस सरकार ने जो भ्रष्टाचार और वादाखिलाफी की, उसके कारण हमें यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि कमलनाथ ने मुख्यमंत्री रहते कभी इस क्षेत्र में चेहरा नहीं दिखाया। दूसरी तरफ शिवराज जी हैं, जिन्होंने यहां आने से पहले 250 करोड़ के कामों को मंजूरी दे दी। कमलनाथ हमेशा पैसों का रोना रोते रहते थे, लेकिन अब शिवराज जी ने जनता के लिए खजाना खोल दिया है। श्री सिंधिया ने कहा कि आने वाला चुनाव करो या मरो की लड़ाई है। यह ग्वालियर- चम्बल क्षेत्र के मान सम्मान और प्रदेश का भविष्य तय करने वाला चुनाव है। ये वादाखिलाफी करने वालों और भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाने की लड़ाई है। इसलिए आने वाले चुनाव में कांग्रेस को जवाब दें और सभी सीटों पर हराएं।

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