कृषि सेक्टर में जमीन तक निजी निवेश पहुंचना जरूरी- केंद्रीय मंत्री श्री तोमर


नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि कृषि के क्षेत्र में सरकारी निवेश तो पिछले पांच-छह वर्षों में तेजी हुआ है लेकिन इस क्षेत्र में विकास की संभावनाओं को देखते हुए अब यह जरूरी है कि निजी निवेश भी कृषि क्षेत्र में जमीनी स्तर पर गांव तक पहुंचे। श्री तोमर ने कहा कि अब तक प्राइवेट सेक्टर निवेश करता भी है तो जिला स्तर पर, इस कारण से किसानों और ग्रामीणों तक वे कृषि सुविधाएं नहीं पहुंच पाती हैं जिनकी जरूरत है। केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने यह बात शनिवार को मर्चेंटस् चेंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज द्वारा कोराना काल में कृषि क्षेत्र की चुनौतियां और संभावनाएं विषय पर आयोजित वेबिनार में कही। श्री तोमर ने कहा कि देश में कृषि क्षेत्र में एक बड़ा असंतुलन बना हुआ है। जहां कोल्ड स्टोरेज और गोदाम बनाना थे वहां बने नहीं, और जहां बनाए गए हैं वहां कृषक अपना माल लेकर नहीं पहुंच पाता है। इसके चलते ही आलू-प्याज के सड़ने और अनाज के बारिश में भीगने के मामले सामने आते रहे हैं। पिछले पांच-छह वर्ष में हमारी सरकार ने इस असंतुलन को दूर करने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कृषि अधोसंरचना विकास के लिए एक लाख करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया है। कृषि क्षेत्र में सही दिशा में अधोसंरचना का निर्माण हो इसके लिए सरकार के साथ-साथ व्यापारी संगठनों को भी आगे आना चाहिए। श्री तोमर ने कहा कि गांवों में ही किसानों को अपनी उपज के भंडारण के लिए गोदाम और कोल्ड स्टोरेज मिल जाए इसके लिए सरकार ने ग्रामीण गोदाम योजना भी बनाई है। इससे गांवों मे भी खाद्यान्न भंडारण क्षमता बढ़ सकेगी। केंद्रीय कृषि मंत्री श्री तोमर ने कहा कि हमारे देश में कृषि और गांव सबसे बड़े उत्पादक तो हैं ही सबसे बड़े उपभोक्ता भी हैं। इसलिए हमारा यह प्रत्यन होना चाहिए कि यह क्षेत्र कैसे आगे बढ़े। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों में यह प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। श्री तोमर ने कहा कि कृषि क्षेत्र मुनाफे में आएगा तो इसकी क्रय शक्ति बढ़ेगी और इसी से उद्योग-धंधे चल पाएंगे। इसलिए हमारा प्रयास यही होना चाहिए कि सबसे बड़े उपभोक्ता वर्ग की आर्थिक स्थिति मजबूत हो, ताकि अर्थव्यस्था में तेजी से गति आए। श्री तोमर ने कहा कि एक समय था जब सरकारी योजना का लाभ आम आदमी तक पहुंचना कठिन होता था। देश में एक ऐसा सक्षम वर्ग बन गया था जो सभी सरकारी योजनाओं का फायदा लेता था और आम आदमी इनसे दूर रह जाता था। लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने तय किया कि ये लीकेज बंद होना चाहिए। जनधन योजना के तहत 36 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खोले गए और आज उनमें सरकार की योजनाओं का पैसा सीधे ऑनलाइन पहुंच रहा है। श्री तोमर ने बताया कि देश में पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से महिलाओं के स्वसहायता समूहों का बड़ा नेटवर्क कार्य कर रहा है। कोरोना संक्रमण में इन समूहों ने मास्क और सैनेटाइजर बनाकर ग्रामीण इलाकों में संक्रमण रोकने में अहम भूमिका निभाई है। व्यापारी संगठन इन स्वसहायता समूहों के साथ मिलकर काम कर सकते हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं को भी उनके द्वारा बनाए गए सामान के बेहतर दाम मिल पाएंगे और हम भी बाजार की आवश्यक्ता को पूर्ण कर पाएंगे। वेबिनार में केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने व्यापारियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए। कार्यक्रम में मर्चेंटस् चेंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष विवेक गुप्ता के साथ ही चेंबर के पदाधिकारी एवं देश के कई व्यापारीगण उपस्थित थे।


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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये