पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व.राजीव गांधी की जयंती पर कांग्रेस ने किया नमन


ग्वालियर। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डाॅ. देवेन्द्र शर्मा की अध्यक्षता में आज भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की 76वीं जयंती कार्यक्रम श्रीमंत माधवराव सिंधिया कांगेस भवन पर सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी कांग्रेसजनो ने कांग्रेस भवन पर स्थापित पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी की प्रतिमा पर माल्यपर्ण कर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता आनंद शर्मा ने किया। उक्त जानकारी शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी है। विज्ञप्ति अनुसार शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डाॅ. देवेन्द्र शर्मा ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को पुष्पांजलि अर्पित कर सभी कांग्रेसजन को संबोधित करते हुए कहा कि स्व. राजीव गांधी ने लोकतंत्र को बचाने, जनमत के निर्णय को सर्वोपरी रखने के लिये संविधान में संषोधन करते हुए दलबदल विधेयक कानून बनाया। जिसका उद्देश्य दलबदल के आधार पर सत्ता हथियाने से रोकना था, भाजपा ने मप्र सहित अन्य प्रांतो में सत्ता हथियाने के लिये अवसरवादियों से सांठगांठ कर सत्ता हथिया कर दलबदल के कानून का उल्लघन किया और जनमत के कानून का अपमान किया। स्व. राजीव गांधी जी कर्मयोगी थे, कार्य के प्रति लगन थी, पायलेट थे, सौम्य सरल  स्वाभाव के थे। राजीव जी भारत के 9वें प्रधानमंत्री थे, उन्हे भारत रत्न से नवाजा गया था। भारत रत्न राजीव गांधी जी युग पुरूष थे। महिलांओ को 33 प्रतिषत आरक्षण राजीव गांधी ने देकर महिलांओ को उनका अधिकार दिया। देश का लगभग 65 प्रतिशत युवा मत देने के अधिकार से वंचित था, उसे मत देने का अधिकार उन्होंने ही दिलाया। श्री राजीव गांधी जी देश में कम्प्यूटर क्रांति के जनक थे। 21वीं सदी के युग निर्माता थे, देश में पंचायती राज को स्थापित किया। कारगिल युद्ध में बोफोर्स तोपो ने दुश्मन से छुटकारा दिलाया गया। जब श्री अटल विहारी वाजपेयी के बीमार होने की जानकारी श्री राजीव गांधी की जो प्राप्त हुई तो उन्होने अटल जी केा बुलाकर कहा कि आप भारत के प्रतिनिधि मंडल में सम्मलित होकर विदेश जाइये और वहां पर अपना इलाज कराईये, आपके इलाज का खर्चा भारत सरकार उठायेगी, आपकी चिता करना मेरा, प्रत्येक देशवासी का कर्तव्य है। अटल जी ने इलाज कराने के बाद कहा कि श्री राजीव गांधी जी ने मेरा इलाज कराकर भारत की भाईचारे की परांपरा को कायम किया है। प्रधानमंत्री के रूप में पंजाव और आसाम में आंतकवाद को समाप्त कर शांति स्थापित कर देश को विकास की राह पर ले जाकर ऐतिहासिक कार्य किया ओर श्रीलंका में शांति दूत बनकर गये थे। वहां पर जो उन पर हमला हुआ उससे वे विचलित नही हुए। 21 मई 1991 को पेरम्बदूर (मद्रास) में आमसभा के दौरान आत्मघाती हमला किया गया। जिसमें वह अपने देश की एकता अंखडता के लिये शहीद हो गये। कार्यक्रम में प्रदेश उपाध्यक्ष अषोक सिंह, प्रदेश सचिव हरिओम शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष संगठन प्रभारी महाराज सिंह पटेल, अमर सिंह माहोर, वीर सिंह तौमर, सुरेन्द्र यादव, अशोक प्रेमी, जयराज सिंह चैहान, प्रेमनारायण यादव, श्रीमती कुसुम शर्मा, प्रवक्ता आनंद शर्मा, धर्मेन्द्र शर्मा, वीरेन्द्र तौमर, सरमन सिंह राय, इंद्रजीत सिंह चैहान, हेवरन सिंह कंसाना, चतुर्भुज धनोलिया, हरेन्द्र गुर्जर, संजय फड़तरे, तरूण यादव, संजय फड़तरे, संत्येन्द्र सिंह तोमर, संजीव दीक्षित, भरत शर्मा, नाजिम खान, राजेश जाटव, कपिल पाल, विमल शर्मा, दिनेश पाल, वीणा भारद्वाज, विनोद शर्मा, पूरन सिंह कुशवाह, केदार सिंह किरार, शरद यादव, श्रीमती ममता रजक, संजय नरवरिया, मुकेश चैरसिया, अनुप शिवहरे, राकेश सिंह गुर्जर, अजय सिंह गुर्जर, धीरेन्द्र जाटव, चेतन भार्गव, अशोक सिंह तोमर, नबाव मुमताज अहमद, ओमप्रकाश शर्मा, अजय जोहरी, राजू बाथम, राजेन्द्र कुशवाह, निशा मिर्जा, गोपाल सोलंकी, रामवती कौशल, सुशांत राठौर, सुशील श्रीवास्तव, सुमन वर्मा, तरूण कुशवाह, शुभम मधुरिया, कपिल खटीक, शाहिद खान आदि उपस्थित रहें।


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