भारत में पहली बार 24 घंटे के भीतर कोविड-19 के एक लाख से अधिक मरीज हुए ठीक


नयी दिल्ली। भारत में पहली बार एक दिन में कोविड-19 के एक लाख से अधिक मरीज ठीक हुए हैं और इसके साथ ही देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोंगों के ठीक होने की दर बढ़कर 80.86 प्रतिशत हो गई है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में पिछले 24 घंटे में 76 हजार से कम नए मामले सामने आए। मंत्रालय की ओर से सुबह आठ बजे जारी किए गए अद्यतन आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में 75,083 नए मामले सामने आए जबकि 1,01,468 लोग संक्रमणमुक्त हुए। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में 75,083 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमण के मामले बढ़कर 55,62,663 हो गए। वहीं, 1,053 और लोगों की मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 88,935 हो गई। कुल 44,97,867 लोगों के संक्रमण मुक्त होने के बाद देश में मरीजों के ठीक होने की दर 80.86 प्रतिशत हो गई है। कोविड-19 से मौत की दर 1.60 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार देश में अभी 9,75,861 मरीजों का कोरोना वायरस के लिए इलाज जारी है, जो संक्रमण के कुल मामलों का 17.54 प्रतिशत है। भारत में आठ सितम्बर के बाद पहली बार 76 हजार से कम नए मामले सामने आए हैं। आठ सितम्बर को 75,809 नए मामले सामने आए थे। भारत में कोविड-19 के मामले सात अगस्त को 20 लाख के पार, 23 अगस्त को 30 लाख के पार, पांच सितम्बर को 40 लाख के पार और 16 सितम्बर को 50 लाख के पार चले गए थे। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार देश में 21 सितम्बर तक कुल 6,53,25,779 नमूनों की कोविड-19 की जांच की गई, इनमें से 9,33,185 नमूनों की जांच सोमवार को ही की गई। आंकड़ो के अनुसार पिछले 24 घंटे में जिन 1,053 लोगों की मौत हुई, उनमें से सबसे अधिक 344 लोग महाराष्ट्र के थे। इसके अलावा कर्नाटक के 122, उत्तर प्रदेश के 88, पश्चिम बंगाल के 62, तमिलनाडु के 60, आंध्र प्रदेश के 51, पंजाब के 47, मध्य प्रदेश के 37 और दिल्ली के 32 लोग थे। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अभी तक कुल 88,935 लोगों की मौत हुई है, इनमें सर्वाधिक 33,015 लोग महाराष्ट्र के हैं। वहीं, तमिलनाडु के 8,871, कर्नाटक के 8,145, आंध्र प्रदेश के 5,410, उत्तर प्रदेश के 5,135, दिल्ली के 5,014, पश्चिम बंगाल के 4,421, गुजरात के 3,336 , पंजाब के 2,860 और मध्य प्रदेश के 2,007 लोग शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय इस बात पर जोर दिया कि संक्रमण की वजह से मरने वाले 70 प्रतिशत से अधिक मरीज दूसरी बीमारियों से भी ग्रसित थे। मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर कहा, ''हमारे आंकड़ों का मिलान आईसीएमआर से किया जा रहा है।''

टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये