उत्तर प्रदेश में जल्द पूरी होगी 31661 पदों पर भर्ती प्रक्रिया, 69 हजार शिक्षक भर्ती मामला


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर लगातार विपक्षी पार्टियों का निशाना बन रही योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को पिछले लगभग डेढ़ साल से भी ज्यादा लंबे समय से अटकी 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती मामले में बड़ा ऐक्शन लिया है। यूपी सरकार ने सहायक अध्यापक भर्ती मामले में 31661 पदों पर जल्द भर्ती कराने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने कहा है कि यह भर्ती 21 मई 2020 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से पारित आदेश के अनुसार कराई जा रही है। दरअसल हाईकोर्ट की ओर से शिक्षामित्रों के लिए निर्धारित पदों को छोड़कर अन्य सभी पदों पर भर्ती कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद सरकार ने अब अन्य बचे हुए 31661 पदों पर सहायक अध्यापकों की भर्ती कराने का निर्देश जारी किया है।
एक सप्ताह में पूरी हो भर्ती प्रक्रिया : यूपी सरकार ने यह भी कहा है कि 31661 पदों पर होने वाली यह भर्ती प्रक्रिया एक सप्ताह में ही पूरी कर ली जाए जबकि 69 हजार में से अन्य सभी बचे हुए पद शिक्षामित्रों के लिए रोके गए हैं। बता दें कि उत्तर प्रदेश में 6 जनवरी 2019 को 69 हजार पदों पर सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए परीक्षा का आयोजन किया गया था। इस परीक्षा के एक दिन बाद ही 7 जनवरी 2019 को ही सरकार की ओर से शासनादेश जारी करते हुए कहा गया था कि इस परीक्षा में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण होने के लिए 65 फीसदी अंक और पिछड़ा वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग को उत्तीर्ण होने के लिए 60 फीसदी अंक लाना अनिवार्य होगा।
21 मई 2020 को हाईकोर्ट ने दिया था ये आदेश : हालांकि सरकार के इस फैसले के खिलाफ शिक्षामित्रों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। जिसमें यह मांग की गई थी कि इस भर्ती प्रक्रिया को भी पहले की तरह ही 40 फीसदी और 45 फीसदी उत्तीर्ण अंकों के साथ ही पूरा किया जाए। इसके बाद हाईकोर्ट ने 21 मई 2020 को शिक्षामित्रों की ओर से निर्धारित पदों को छोड़कर सरकार को अन्य पदों पर भर्ती कराने का निर्देश दिया था। हालांकि अब सरकार की ओर से इन पदों पर एक सप्ताह के अंदर ही भर्ती प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दे दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा मामला : हाईकोर्ट के आदेश के बाद 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया को पूरा कराने की प्रक्रिया शुरू की गई थी लेकिन बीती 3 जून को काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान ही कोर्ट की ओर से इस भर्ती प्रक्रिया पर स्टे लगा दिया गया था। हालांकि इसके बाद कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार 21 जून के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के ध्यान में रखते हुए चयन प्रक्रिया को जारी रखने के लिए स्वतंत्र है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की ओर से भी 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में शिक्षामित्रों के लिए 37000 पद रोककर रखे गए हैं।

टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये