संकट मोचन मंदिर में हर मंगलवार को रूप बदलते हैं बालाजी सरकार

बालाजी सरकार के दर्शन मात्र से पूरी होती है मनोकामना
ग्वालियर। गोलपाड़ा स्थित संकट मोचन हनुमान (बालाजी) मंदिर में बालाजी सरकार हर मंगलवार को रूप बदलते हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा लेकिन यह सत्य है। हालांकि इस सत्य के पीछे बालाजी सरकार के चरणसेवक जगवीर दास की श्रद्धा, विश्वास और लगन है। वे हर मंगलवार को सुबह 4 बजे मंदिर पहुंचकर दूध, दही, शहद, गंगाजल, शुद्ध जल से बालाजी सरकार का अभिषेक करते हैं फिर शुरू होता चोला-शृंगार का दौर। वे बताते हैं कि मैं प्रभु के चोला शृंगार में इतना तल्लीन हो जाता हूं कि 4 बजे से सुबह के 9 कब बज जाते हैं पता ही नहीं चलता और जब चोला-शृंगार के बाद बालाजी महाराज का रूप सामने आता है उसे देखकर भक्त कह उठते हैं-अरे बालाजी महाराज ने तो रूप बदल लिया है। यह क्रम मंगलवार को अनवरत जारी रहता है हालांकि बीच-बीच में दिन व तिथि व त्यौहार के हिसाब से शनिवार को भी चोला-शृंगार किया जाता है।
मंदिर में चार महीने से चल रहा है हवन-यज्ञ
संकट मोचन हनुमान (बालाजी) मंदिर में पिछले 125 दिन से प्रतिदिन सायं 8 बजे हवन-यज्ञ होता है। यह क्रम 4 मई 2020 से शुरू हुआ था और अयोध्या में रामलला के विराजमान होने तक अनवरत रूप से जारी रहेगा। ऐसा करने वाला संभवत: संकट मोचन मंदिर देश में पहला मंदिर होगा।
भक्त लगाते हैं सवामनी का भोग
मंदिर में आने वाले भक्त बालाजी सरकार से श्रद्धापूर्वक किसी कार्य के पूरे होने की अर्जी लगाते हैं और जब वह पूरा हो जाता है तो प्रभु को सवामन का भोग लगाते हैं। इसे सवामनी के रूप में भक्तों को वितरित किया जाता है। यह क्रम भी पिछले काफी समय से अनवरत चल रहा है। सवामनी का भोग मेहदीपुर बालाजी के दरबार में लगता है। लेकिन कोरोना काल में मेहदीपुर मंदिर बंद हो जाने के कारण भक्तों के लिए यह सुविधा गोलपाड़ा स्थिति मंदिर में शुरू की गई है।
मंदिर में नहीं चढ़ता चढ़ावा
आज के आर्थिक युग में जब आम आदमी हो या संत-महंत पैसे के पीछे भाग रहा है लेकिन संकट मोचन हनुमान (बालाजी) मंदिर में चढ़ावा नहीं चढ़ाया जाता। इससे बचने के लिए मंदिर में कोई दानपात्र तक नहीं रखा गया है। इसपर चरणसेवक जगवीर दास का कहना है कि इस मंदिर में कोई प्रबंधक या महंत नहीं है। मैं तो चरणसेवक हूं। वे कहते हैं मैं अपना पूरा ध्यान बालाजी सरकार के चरणसेवक के चरणों में लगाना चाहता हूं रुपये-पैसों से ध्यान भटकने की संभावना है इसलिए मैंने मंदिर में दानपात्र नहीं रखवाए हैं। न होंगे दानपात्र और न चढ़ेगा चढ़ावा। वैसे भी बालाजी सरकार तो दुनिया को देने वाले हैं उन्हें रुपये-पैसे की क्या आवश्यकता।
बालाजी सरकार पूरी करते हैं मनोकामना
बालाजी सरकार के भक्तों में यह आम धारणा है कि यहां सच्चे मन से जो भी मांगा जाता है वह अवश्य पूरा होता है। इसके एक नहीं कई उदाहरण है। सबसे बड़ा उदाहरण हैं 2017 में हुई बारिश। उस साल बारिश से पूर्व शहर में पीने के पानी का संकट पैदा होता जा रहा था। और पानी का एकमात्र स्रोत तिघरा सूखने की कगार पर था। ऐसे में चरणसेवक जगवीर दास ने शहर में अच्छी बारिश के लिए 31 दिन का हनुमत जन्मोत्सव मनाया। 31 दिन तक लगातार अखंड पाठ सहित कई धार्मिक आयोजन किये गये। और उस समय भक्तों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब प्रभु बालाजी सरकार की कृपा से शहर में इतनी शानदार बारिश हुई कई साल से फुल लेबल तक पहुंचने को तरस रहा तिघरा न सिर्फ फुल बल्कि कई बार उसके गेट खोलकर उसमें से पानी निकाला गया। इसके अलावा भी कई उदाहरण हैं। जिन्हें खुद भक्त अपने मुंह से बताते हैं।

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