योगी सरकार ने दुर्गा पूजा और रामलीला को दी मंजूरी, बैंड-बाजा के साथ निकल सकेगी बारात


लखनऊ। अगले महीने से एक के बाद एक त्यौहार शुरू होने जा रहे हैं। इनमें नवरात्र, दशहरा, धनतेरस और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार हैं। दुर्गा पूजा से लेकर रामलीला तक का आयोजन होता है। इस बार कोरोना वायरस के चलते त्योहारों और आयोजनों को लेकर सख्ती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दो प्रमुख आयोजनों दुर्गा पूजा और रामलीला को लेकर गाइडलाइंस जारी की हैं। इस बार सार्वजनिक दुर्गा पूजा के आयोजनों पर रोक लगाई गई है, वहीं रामलीला मंचन को लेकर नियम बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि रामलीलाओं का मंचन प्राचीन परंपरा है। दशकों से परंपरा के अनुसार रामलीलाएं होती आई हैं। ऐसे में इस बार परंपरा न टूटे इसलिए रामलीलाओं के मंचन को छूट दी गई है लेकिन इसके लिए कुछ नियम और शर्तें भी लागू की गई हैं।
रामलीला मचंन के दौरान होंगे ये नियम : सीएम योगी ने कहा कि रामलीला स्थलों पर 100 से ज्यादा दर्शक एकत्र नहीं हो सकेंगे। जो दर्शक रामलीला देखेंगे उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी होगा। इसके अलावा रामलीला स्थल पर और लोगों को सैनिटेशन करना आवश्यक होगा। हर किसी के चेहरे पर मास्क लगा होना जरूरी रहेगा।
नहीं लगेंगे पंडाल, घरों में रख सकते हैं प्रतिमाएं : वहीं दुर्गा पूजा को लेकर सार्वजनिक आयोजनों पर रोक लगाई गई है। सीएम ने कहा कि इस बार दुर्गा पूजा के दौरान किसी को भी जुलूस निकालने की इजाजत नहीं होगी। लोग अपने घरों में मूर्ति स्थापित करके पूजा कर सकते हैं। दुर्गा पूजा के सार्वजनिक पंडालों पर इसलिए रोक है ताकि भीड़ एकत्र न हो।
नहीं लगेंगे मेले : हर साल दुर्गा पूजा के दौरान और दशहरे पर मेले का आयोजन किया जाता था लेकिन इस बार मेले आयोजित नहीं होंगे। सीएम ने कहा कि अगर मेला लगेगा तो लोगों की भीड़ जमा होगी और ऐसे में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ेगा इसलिए इस पर रोक लगाई गई है।
बैंड, बाजा, बारात की अनुमति : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शादी-ब्याह का सीजन आ रहा है ऐसे में बैंड बाजा और रोड लाइट की अनुमति दी जा रही है। लेकिन शादी-बारात में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी होगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि आयोजनों में सौ से ज्यादा लोग शामिल नहीं हो सकेंगे।

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये