सरकार बताए मुर्ति का साईज छोटा करने से कैसे रुकेगा कोरोना: जगवीर दास


29 सितंबर से हर मंगलवार को जलेगा मध्य प्रदेश सरकार का पुतला और नवरात्रि में 9 दिन जलेगा मुख्यमंत्री का पुतला
ग्वालियर। संकट मोचन हनुमान बालाजी मंदिर गोल पाड़ा के सेवक जगबीर दास ने प्रदेश सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से पूछा है की सरकार दुर्गा माँ की मूर्तियों का साईज छोटा रखने की गाईड लाईंन पर पूछा है की मूर्ति के साईज को कम रखने से कोरोना कैसे रुकेगा। इसके साथ साथ ही उन्होने व्यथित होकर घोषणा की है कि वह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय शिवराज सिंह जी का पुतला फूंक कर मांग करेंगे कि आस्था और विश्वास के प्रतीक धार्मिक मंदिरों धार्मिक त्योहारों को प्रतिबंधित करने जैसा कार्य 6 माह में बहुत हो चुका है अब और ना करें । 19 सितंबर को मध्य प्रदेश सरकार ने नवदुर्गा पर गाइड लाइन तय की है। मूर्ति का साइज पंडाल का साइज भक्तों की संख्या तय की है। चल समारोह नहीं होगा। दांडिया गरबा नहीं होगा। 10 लोग से अधिक व्यक्ति नहीं होंगे। वहीं राजनीतिक गतिविधियों को ना तो प्रतिबंधित किया गया है। ना सीमित किया गया है। लगातार मंत्री लोकार्पण कर रहे हैं। भीड़ लगा रहे हैं। दोनों ही दलों के जिला अध्यक्ष आयोजित कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आवाहन कर रहे हैं। इसका तात्पर्य यह हुआ कि चंद विधायक, नेता सरकार को चलाने वाले धर्म से ऊपर हैं। आस्था विश्वास के मंदिरों से ऊपर हैं इसलिए धर्म प्रेमी जनता के गुस्से का भी ख्याल नहीं कर रहे हैं और धर्म प्रेमी जनता की आस्था विश्वास पर चोट पर चोट किए जा रहे हैं। अभी हाल ही में गणेश जी का साइज तय कर 2 फुट का दिया गया। सरकार ने यह दिखाया कि सारा कोरोना मूर्ति के साइज पर ही निर्भर करता है। जबकि ग्वालियर में व संभाग भर में राजनीतिक गतिविधियों को तेज करते हुए दोनों ही दलों ने कोरोना संक्रमण को चरम पर पहुंचा दिया। परिणाम स्वरूप ग्वालियर में रोजाना 2 सैकड़ा से अधिक मरीज मिलना शुरू हो गए।
सेवक जगबीर दास ने मांग की है कि 28 सितंबर तक नवदुर्गा के समय में लगाए गए सभी तरह के प्रतिबंधों को वापस लिया जाए। या फिर इसी तरह के प्रतिबंध राजनीतिक दलों के कार्यालयों कार्यक्रमों प्रदर्शनों बैठकों पर मंच पर कार्यकर्ताओं की संख्या पर लगाया जाए अन्यथा मंदिर प्रांगण में सेवको के द्वारा भक्तों के द्वारा दर्शनार्थियों के द्वारा धर्म प्रेमी जनता द्वारा घोषित कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा और 29 सितंबर मंगलवार रात्रि 8:00 बजे मध्य प्रदेश सरकार का पुतला फूंका जाएगा।
मंदिर प्रांगण में तीसरे लॉकडाउन 4 मई से अयोध्या में बन रहे राम मंदिर निर्माण कार्य में किसी तरह की बाधा ना आए इसके लिए लगातार यज्ञ हवन चल रहा है जो कि अयोध्या में भव्य मंदिर बनने के बाद रामलला जिस दिन अपने स्थान पर विराजमान होंगे उस दिन तक निरंतर जारी रहेगा उसी दिन पूर्णाहुति होगी।

टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये