विधानसभा उपचुनावों मे शिवराज-सिंधिया और कमलनाथ की साख दाव पर


ग्वालियर। मप्र के उपचुनाव में 28 विधानसभा सीटों पर सिंधिया को 22 सीटों पर, जिसमें 16 सीटों उनके प्रभाव क्षेत्र ग्वालियर -चम्बल की है। उन्हें बचाना सबसे बड़ी चुनोती है। मुख्य मुकाबला ग्वालियर और चम्बल की 16 सीटों पर होगा। बीजेपी जहां पर अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिये सदस्यता अभियान चला रही है। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस भी सत्ता में आने का भरसक प्रयास कर रही हैं। कांग्रेस ने 15 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। वहीं, बीजेपी के 25 सीटों पर प्रत्याशी लगभग तय हो चुके हैं। लेकिन, नाम की आधिकारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है। सीएम शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही बीजेपी के दिग्गज नेता मप्र में डेरा जमाये हुए हैं, वही कांग्रेस की ओर से चुनाव प्रचार का जिम्मा कमलनाथ ने संभाल रखा हैं।
मप्र में पहली बार इतने स्तर पर क्यों हो रहा चुनाव
मप्र में 28 सीटों पर विधानसभा उपचुनाव होने वाले हैं। पहली बार मप्र में इतने बड़े पैमान पर उपचुनाव हो रहे हें। इस वजह से मप्र में मार्च में हुआ राजनैतिक फेरबदल है। दरअसल, इसी वर्ष 10 मार्च को ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस के 22 विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थामा था। इसके बाद अल्पमत में आई कमलनाथ सरकार गिर गयी थी।
कांग्रेस विधायकों के इस्तीफा देने से 22 विधानसभा सीटें रिक्त होने के बाद जुलाई में बड़ा मलहरा से कांग्रेस विधायक प्रद्युम्नसिंह लोधी और नेपानगर से कांग्रेस विधायक सुमित्रा देवी कसडेकर ने भी कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी ज्वाइन कर ली थी। फिर मांधाता विधायक ने भी कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। इसके अलावा 3 विधायकों का निधन हो गया यानी कि 28 विधानसभा सीटें खाली हो गयी हैं।

इन 28 सीटों पर हो रहे हैं उपचुनाव

सीट2018 में जीते सदस्यउपचुनाव क्यों?
ग्वालियर प्रद्युम्न सिंह तोमर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
डबरा इमरती देवी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
बमोरी महेंद्र सिंह सिसोदिया कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
सुरखी गोविंद सिंह राजपूत कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
सांची प्रभुराम चौधरी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
सांवेर तुलसीराम सिलावट कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
सुमावली एदल सिंह कंषाना कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
मुरैना रघुराज सिंह कंषाना कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
दिमनी गिर्राज दंडौतिया कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
अम्बाह कमलेश जाटव कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
मेहगांव ओपीएस भदौरिया कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
गोहद रणवीर जाटव कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
ग्वालियर पूर्वमुन्नालाल गोयल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
भांडेर रक्षा संतराम सरौनिया कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
करेरा जसमंत जाटव छितरी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
पोहरी सुरेश धाकड़ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
अशोक नगर जजपाल सिंह जज्जी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
मुंगावली बृजेंद्र सिंह यादव कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
अनूपपुर बिसाहूलाल सिंह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
हाटपिपल्या मनोज नरायण चौधरी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
बदनावर राजवर्धन सिंह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
सुवासरा हरदीप सिंह डंग कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
मलहरा प्रद्युम्न सिंह लोधी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
नेपानगर सुमित्रा देवी कास्डेकर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
मंधाता नारायण पटेल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए
जौरा बनवारीलाल शर्मा निधन
आगर मनोहर ऊंटवाल निधन
ब्यावरा गोवर्धन दांगी निधन


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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये