युवाओं के लिए खुशखबरी : 10वीं पास से लेकर एमएससी, एमटेक तक के लिए इसरो ने निकाली वीकेंसी ही वीकेंसी

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) युवाओं को नौकरी का शानदार मौका दे रहा है। आपने 10वीं कक्षा पास की हो या एमएमसी / एमटेक उत्तीर्ण हों, या फिर पीएचडी.. हर स्तर के लिए इसरो ने वैकेंसी निकाली है। इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों को प्रति माह 2,08,700 रुपये मिलेंगे। इसके लिए इसरो के अंग स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC) ने मार्च 2020 में ही नोटिफिकेशन जारी किया था। लेकिन कोविड-19 व लॉकडाउन के कारण तब आवेदन व भर्ती की पक्रिया स्थगित कर दी गई थी। अक्टूबर में आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुई। अब अप्लाई करने के लिए कुछ ही दिन बचे हैं।
किन पदों पर वैकैंसी
साइंटिस्ट/ इंजीनियर एसडी (इलेक्ट्रॉनिक्स) - 2 पद
साइंटिस्ट/ इंजीनियर एसडी (फीजिक्स) - 1 पद
साइंटिस्ट/ इंजीनियर एसडी (कंप्यूटर) - 2 पद
साइंटिस्ट/ इंजीनियर एससी (कंप्यूटर) - 1 पद
साइंटिस्ट/ इंजीनियर एससी (इलेक्ट्रॉनिक्स) - 7 पद
साइंटिस्ट/ इंजीनियर एससी (मैकेनिकल) - 6 पद
साइंटिस्ट/ इंजीनियर एससी (स्ट्रक्चरल) - 1 पद
साइंटिस्ट/ इंजीनियर एससी (इलेक्ट्रिकल) - 1 पद
टेक्निकल असिस्टेंट (इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रिकल) - 6 पद
टेक्नीशियन बी (फिटर, मशीनिस्ट, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, प्लंबर, कारपेंटर, इलेक्ट्रीशियन, केमिकल) - 25 पद
ड्राफ्ट्समैन बी (मैक्निकल) - 3 पद
कुल पदों की संख्या - 55
कब तक कर सकते हैं आवेदन : इसरो के इन पदों पर ऑनलाइन आवेदन करना है। ऑनलाइन अप्लाई करने की अंतिम तारीख 15 अक्टूबर 2020 है।
जरूरी योग्यताएं : अलग-अलग पदों के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यताएं व उम्र सीमा भी अलग-अलग मांगी गई है। इसकी विस्तृत जानकारी के लिए आप उस पद के लिए जारी ऑफिशियल नोटिफिकेशन देख सकते हैं। आगे दिए गए नोटिफिकेशन लिंक पर क्लिक करें।
डायरेक्ट लिंक्स
ISRO वैकेंसी के लिए जारी नोटिफिकेशन पढ़ने और अप्लाई करने के लिए यहां क्लिक करें।
ISRO Jobs की वेबसाइट पर जाने के लिए यहां क्लिक करें।

टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये