भारतीय जाबांजों ने लद्दाख बॉर्डर के पास से पकड़ा चीनी सैनिक

नई दिल्ली। भारत और चीन में चल रहे तनाव के बीच ईस्टर्न लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर आज भारतीय सैनिकों ने एक चीनी सैनिक को हिरासत में लिया है। वह चीनी सेना में कॉरपोरल रैंक में है, जिसे डेमचॉक एरिया में हिरासत में लिया गया। आज सुबह चीनी सैनिक को भारतीय साइड में पकड़ा गया। बाद में चीन सेना की तरफ से भारतीय सेना को बताया गया कि उनका एक सैनिक मिसिंग है और भारतीय सेना से उसे ढूंढ़ने की रिक्वेस्ट भी की गई। हालांकि भारतीय सेना तब तक उसे हिरासत में ले चुकी थी। काफी खोजने के बाद भारतीय सेना को चीनी सैनिक मिला। वहां की बेहद खराब वेदर कंडीशन में उसे सुरक्षित रखने के लिए उसे खाना दिया गया, गर्म कपड़े दिए गए और ऑक्सीजन दी गई। उसकी पहचान चीनी सेना में कॉरपोरल वांग यालांग के तौर पर हुई है। अभी वह चीनी सैनिक भारतीय सेना की हिरासत में है। जिससे पूछताछ की जा रही है। चीनी सैनिक को प्रोटोकॉल के हिसाब से जरूरी प्रक्रिया पूरे करने के बाद चुशूल-मॉल्डो बीपीएम पॉइंट से वापस चीनी सेना को सौंपा जाएगा।
भारत और चीन की सेनाएं अप्रैल-मई से आमने-सामने हैं। पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल के कई पॉइंट्स पर दोनों तरफ से तनातनी है। मुख्‍य तनाव बिंदुओं में डेमचॉक के अलावा पैंगोंग झील का उत्‍तरी और दक्षिणी तट, देपसांग का मैदानी इलाका शामिल हैं। सीमा पर दोनों तरफ से भारी संख्‍या में जवानों की तैनाती है। ऐसे वक्‍त में किसी चीनी सैनिक का अनजाने में सीमा पार करके चले आना बड़ी घटना है। दोनों देशों के बीच की सीमाएं तय न होने की वजह से अक्‍सर ऐसे वाकये होते रहते हैं। भारत अनजाने में सीमा पार कर आए चीनी नागरिकों को सकुशल वापस भेजने में हिचकता नहीं। इसी तनाव के बीच एक चीनी जोड़ा रास्‍ता भटक गया था। सेना ने न सिर्फ उनको रास्‍ता दिखाया, बल्कि खाना खिलाया और पूरे वक्‍त उनका ध्‍यान रखा। प्रोटोकॉल के अनुसार, अगर कोई अनजाने में सीमा पार करता है तो उसे पूछताछ के बाद वापस सौंप दिया जाता है। हालांकि चीन इस मामले में भी तिकड़मबाजी से बाज नहीं आता। पिछले महीने अरुणाचल प्रदेश के पांच युवा लापता हो गए थे। पूरा शक था कि चीन ने पकड़ रखा है। पहले तो चीन ने कुछ नहीं कहा। बाद में उन्‍हें छोड़ दिया।

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये