प्रवासी मजदूरों को रोजगार देकर ग्रामों में बनी जनोपयोगी अधोसंरचनाएँ : मुख्यमंत्री श्री चौहान

भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कोरोना काल में ग्राम पंचायतों के पदाधिकारियों ने प्रवासी मजदूरों को रोजी-रोटी का साधन दिलवाने, मनरेगा के कार्यों के संपादन और पंच परमेश्वर योजना में ग्राम में जनोपयोगी निर्माण कार्यों को पूरा करवाया है। पंचायत पदाधिकारियों की इस भूमिका को सभी ने सराहा भी है, जिसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की तरफ से पंचायतों के माध्यम से 106 करोड़ 4 लाख रुपये लागत से बनाई गई 1584 संरचनाओं का वर्चुअल कार्यक्रम में लोकार्पण कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कार्यक्रम में कुछ जिलों के पंचायत प्रधानों से ग्रामों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा भी की। कार्यक्रम में प्रदेश के जिलों में उपस्थित जनप्रतिनिधियों के अलावा भोपाल के मिंटो हाल स्टूडियों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि ग्रामों में पक्के आवास, नलजल योजना, प्रधानमंत्री किसान निधि योजना के क्रियान्वयन के साथ ही अन्य स्वीकृत कार्यों को तेजी से पूर्ण करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज लोकनायक जयप्रकाश नारायण और राष्ट्रऋषि नाना जी देशमुख जयंती पर हो रहे इस वर्चुअल लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए ग्रामवासियों से ग्रामों में स्वच्छता और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहते हुए कोरोना जैसी महामारी से बचाव के लिए सजग रहने का आव्हान किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि विपदा के काल में विकसित सामुदायिक भवन, हाट बाजार, यात्री प्रतीक्षालय, सीसी रोड, सामुदायिक स्वच्छता परिसर, पंचायत भवन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का लाभ लेते हुए इन ग्रामीण परिसंपत्तियों के बेहतर रख-रखाव में सभी लोग योगदान दें। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने ग्रामीण अंचल में अधोसंरचना विकास के साथ रोजगार की उपलब्धता के उद्देश्य से यह निर्माण कार्य कोरोना आपदा के दौरान प्रारंभ किये। कुल 106 करोड़ 4 लाख रूपये लागत से बनाई गई इन 1584 सर्व-सुविधा युक्त संरचनाओं में 44 करोड़ 21 लाख की लागत से 318 ग्राम पंचायत भवन, 34 करोड़ 6 लाख की लागत से 262 सामुदायिक भवन तथा 27 करोड़ 59 लाख रुपये की लागत से 1004 सामुदायिक स्वच्छता परिसर शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि यह सभी संरचनायें चुनाव अप्रभावित 33 जिलों की हैं। उन जिलों के निर्माण कार्य इस कार्यक्रम में शामिल नहीं किये गये हैं जहां उप निर्वाचन हैं।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने लोकार्पण के पश्चात कुछ जिलों में पंचायत प्रधानों से चर्चा की। इनमें टीकमगढ़ जिले के पलेरा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत बेला की प्रधान श्रीमती विजयलक्ष्मी राजे, भोपाल जिले की बैरसिया जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत इजगिरी के प्रधान श्री प्रेमदयाल मीणा, खरगौन जिले की वरुण ग्राम पंचायत के प्रधान श्री हीरालाल पिछाले शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ग्राम प्रधानों से ग्रामवासियों को कोरोना काल में मिले मुफ्त राशन, संबल योजना में हुए पंजीयन और अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी भी प्राप्त की। वर्चुअल कार्यक्रम में जिलों के विभागीय अधिकारी तथा जन प्रतिनिधि उपस्थित थे।

 

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये