किर्गिस्तान : जनता ने जबरदस्ती पूर्व राष्ट्रपति को रिहा कराया, तख्तापलट का प्रयास

बिश्केक। किर्गिस्‍तान की राजधानी बिश्केक में रविवार को संसदीय चुनाव के नतीजों के बाद से भारी विरोध प्रदर्शन जारी है। हालात यहां तक खराब हो गए कि प्रदर्शनकारियों ने देश की संसद पर धावा बोल दिया। यही नहीं करीब दो हजार लोगों ने पूर्व राष्ट्रपति अलमाजबेक अतमबयेव को जेल से छुड़ा लिया। वहीं, देश के राष्ट्रपति सूरनबे जीनबेकोव का दावा है कि देश पर अभी भी उनका नियंत्रण है। बता दें कि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव में वोट खरीदे गए थे जिसके विरोध में आक्रामक प्रदर्शन जारी हैं। पुलिस के साथ हिंसक झड़प भी हुई हैं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रण में करने के लिए पानी के कैनन, स्टन ग्रनेड और आंसू गैस का इस्तेमाल किया है। भीड़ देश की संसद और प्रेसिडेंशल ऑफिस में दाखिल हो गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स में हजारों लोग इमारत में घूमते नजर आए। यहां तक कि राष्ट्रपति के दफ्तर में घुसे लोगों ने खिड़कियों से बाहर कागज भी फेंक दिए।
आदिल तुरडुकोव नाम के ऐक्टिविस्ट ने बताया कि नैशनल सिक्यॉरिटी कमिटी की इमारत से पूर्व राष्ट्रपति अतमबयेव को बिना किसी बलप्रयोग के छुड़ा लिया गया और अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश भी नहीं की। उन्होंने हथियार डाल दिए। पूर्व राष्ट्रपति भ्रष्टाचार के केस में ट्रायल के चलते हिरासत में हैं। रिपोर्ट्स का कहना है कि अतमबयेव और सूरनबे आपस में काफी नजदीकी हुआ करते थे लेकिन 2017 में सूरनबे के चुनाव जीतने के बाद दोनों के बीच दरार आ गई। पिछले रविवार को हुए चुनाव में छेड़छाड़ के आरोप के बाद से देश में प्रदर्शन हो रहे हैं। वोटिंग के बाद 16 में से सिर्फ 4 पार्टियां संसद में जगह बना सकीं जिनमें से तीन राष्ट्रपति जीनबेकोव की करीबी हैं। आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रपति के करीबी गुटों ने वोट खरीदने और वोटरों को डराने का काम किया है। इसके बाद विपक्ष की 12 पार्टियों ने साथ आकर ऐलान किया कि वे चुनाव के नतीजों को नहीं मानती हैं। देश के केंद्रीय निर्वाचन आयोग से चुनाव के नतीजों को रद्द करने की मांग भी की गई है।

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