रिटर्न फ़ाइलिंग, टैक्स कलेक्शन, कर चोरी रोकने में मध्यप्रदेश आगे : देवड़ा

भोपाल। मध्यप्रदेश को कॉम्पन्सेशन सेस फंड से 792 करोड़ की राशि अविलम्ब जारी करने के लिये केन्द्र सरकार को धन्यवाद देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए वाणिज्यिक कर मंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि रिटर्न फ़ाइलिंग, टैक्स कलेक्शन एवं कर अपवंचन को रोकने के प्रयासों में मध्यप्रदेश की गणना देश के अग्रणी राज्यों में होने लगी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश इस दिशा में निरंतर सफलताएँ हासिल करता रहेगा। आज जीएसटी काउंसिल की निरंतर जारी 42वीं बैठक में केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री श्री अनुराग ठाकुर ने राज्यों के जीएसटी क्षतिपूर्ति पर चर्चा हुई।
श्री देवड़ा ने कहा कि विकल्प एक चुनने के कारण प्रदेश को 4056 करोड़ रूपये के स्थान पर 4542 करोड़ ऋण लेने की व्यवस्था हो सकेगी। इसका सीधा सकारात्मक असर जनोपयोगी विकास कार्यों पर पड़ेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी राज्य इस दिशा में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर लाभ लेंगे और देश को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने में अपना योगदान देंगे। मंत्री श्री देवड़ा ने केन्द्र सरकार की दूरदृष्टि की प्रशंसा करते हुए आशा व्यक्त की कि भविष्य में भुगतान में विलम्ब होने की स्थिति नहीं रहेगी। कोविड-19 के कारण जो समस्याएं आईं हैं उनका पूरा समाधन भविष्य में हो जायेगा और अर्थव्यवस्था फिर से मजबूत स्थिति में आ जायेगी। वाणिज्यिक कर मंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि मध्यप्रदेश द्वारा विकल्प एक लेने से अब राज्य को ब्याज तथा मूलधन के भुगतान के संबंध में कोई भुगतान नहीं करना होगा। यह राशि कॉम्पन्सेशन फंड से ही भुगतान किया जायेगा। मध्यप्रदेश जैसे राज्य के लिये यह सुविधाजनक है।
मंत्री श्री देवड़ा ने मांग को प्रोत्साहित करने के लिए आज केन्द्र सरकार के कर्मचारियों के लिए विशेष पैकेज घोषित करने पर भारत सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इससे अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ाने के उपाय भविष्य में सार्थक परिणाम देंगे। केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों के लिये ब्याज मुक्त कैपिटल लोन के पैकैज का मध्यप्रदेश हृदय से स्वागत करता है जिसे कुशल वित्तीय प्रबंधन के लिये जाना जाता है। बैठक में प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर श्रीमती दीपाली रस्तोगी, आयुक्त वाणिज्यिक कर श्री राघवेन्द्र सिंह उपस्थित थे।

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये