मुख्यमंत्री चौहान से मिला अंतर मंत्रालयीन दल


भोपाल ।मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अतिवर्षा से प्रदेश के किसानों की फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सर्वोत्तम प्रबंध किए जा रहे हैं। शार्ट टर्म प्रयासों के अंतर्गत किसानों को तत्काल राहत राशि देने के बाद लांग टर्म योजना में किसानों को कृषि कार्य संबंधी मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री  चौहान ने भारत सरकार के अंतर मंत्रालयीन अधिकारी दल से चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री चौहान से आज भेंट करने आए दल को प्रदेश के अति वर्षा और बाढ़ से प्रभावित जिलों के भ्रमण और फसल क्षति का आकलन करने के लिए धन्यवाद दिया।
मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि इस मानसून में अगस्त के अंतिम सप्ताह में हुई अतिवर्षा ने कृषि फसलों को काफी प्रभावित किया। उन्होंने स्वयं अनेक जिलों में जाकर क्षतिग्रस्त फसलें देखीं और किसान बन्धुओं से चर्चा की। केन्द्रीय दल द्वारा भी आकलन की कार्यवाही की गई है। मुख्यमंत्री  चौहान ने दल के सदस्यों से अपेक्षा की कि दल द्वारा वास्तविक प्रतिवेदन सौंपा जाएगा। इससे निश्चित ही मध्यप्रदेश के किसानों के हित में अन्य आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री  मोदी से भेंटकर मध्यप्रदेश में कृषि फसलों को हुए नुकसान की विस्तारपूर्वक जानकारी दी है। मुख्यमंत्री  चौहान ने बताया कि कोविड-19 के संकट के कारण आपदा की मद की राशि का करीब एक तिहाई हिस्सा व्यय करना पड़ा, जिसके फलस्वरूप फसलों की क्षति के लिए भारत सरकार से आर्थिक सहयोग की अपेक्षा है।
मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि अतिवर्षा और बाढ़ की वजह से फसलों की क्षति को देखते हुए कृषि और किसान कल्याण विभाग द्वारा किसानों को क्राप पेटर्न के संबंध में सतत् मार्गदर्शन दिया जाएगा। सिर्फ एक या दो प्रमुख फसलों पर निर्भर रहने वाले किसान बन्धुओं को अंतरवर्ती फसलों के लिए प्रेरित किया जाएगा। पुराने समय में भी किसान साल में चार फसलें बो कर क्षति की आशंका को कम करते हुए अधिक लाभ प्राप्त करने का रास्ता निकलता आया है। आज किसान सिर्फ सोयाबीन के स्थान पर मक्का और धान उत्पादन के लिए आगे आए हैं। रबी और खरीफ दोनों के लिए व्यवहारिक समाधान अपना कर किसानों को लाभान्वित किया जाएगा। मध्यप्रदेश की जलवायु, मिट्टी के मुताबिक फसलों के लिए बुआई और उद्यानिकी से लाभ प्राप्ति पर भी किसानों को मार्गदर्शन मिलेगा। अंतर मंत्रालयीन दल के प्रभारी संयुक्त सचिव श्री राजवीर सिंह ने मुख्यमंत्री  चौहान को दल द्वारा राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठकों और संपादित कार्यों की जानकारी दी। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त  के.के. सिंह, प्रमुख सचिव कृषि  अजीत केसरी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री  चौहान से भेंट करने आए दल में मत्स्य पालन और पशुपालन आयुक्त श्रीमती सुलेखा, संयुक्त संचालक  एन. सत्यनारायण, अवर सचिव  हरित कुमार शाक्य,  घनश्याम मीना, संचालक एफसीडी  सुभाषचंद्र मीना, भारतीय खाद्य निगम के डीजीएम  वीरेन्द्र कुमार भारती के अलावा मध्यप्रदेश के मंडी बोर्ड, बीज प्रमाणीकरण संस्था, कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय और कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।


टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये