राष्ट्र की गौरवशाली परंपराओं व स्वदेशी नीतियों से नई पीढ़ी को अवगत कराना जरूरी

भोपाल। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग अंतर्गत स्वराज संस्थान संचालनालय एवं धर्मपाल शोधपीठ के संयुक्त तत्वावधान में विख्यात गांधीवादी विचारक एवं इतिहासविद् धर्मपाल की 14वीं पुण्यतिथि के अवसर पर 24 अक्टूबर को ''धर्मपाल : भारतीय शिक्षा पद्धति की पुनः खोज करने वाले इतिहासकार'' विषय पर अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया। संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव श्री शिवशेखर शुक्ला द्वारा कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि डॉ. धर्मपाल द्वारा अपने जीवन काल में समाज में की गई सेवा एवं उनके द्वारा स्थापित मूल्यों को वर्तमान पीढ़ी के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए इस तरह के वेबिनार एवं संगोष्ठियाँ समय-समय पर आयोजित की जाना अत्यंत आवश्यक हैं। प्रमुख सचिव संस्कृति एवं उपाध्यक्ष धर्मपाल शोध पीठ श्री शिवशेखर शुक्ला ने कहा कि धर्मपाल की गहन शोध एवं तपस्या का अंशमात्र भी हम लोगों तक पहुंचा पायें तो हमारा वेबीनार सार्थक होगा। हमारे महान भारतवर्ष की गौरवशाली परंपराओं व स्वदेशी नीतियों को हमारी नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए। हमारी युवा पीढ़ी कई कारणों से देश की मुख्यधारा से कट रही है। गौरवशाली अतीत से विमुख लोगों तक हम अपने महान अतीत को पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रमुख सचिव श्री शुक्ला ने कहा कि जुलाई 2020 में भारत सरकार ने नई शिक्षा नीति लागू की है। धर्मपाल जी पर रिसर्च के दौरान भारतीय संस्कृति एवं शिक्षा के तथ्यों पर कार्य किया गया है। पेनडेमिक के दौर में पूरा विश्व नमस्ते करने लगा है। योग करने लगा है। आयुर्वेद अपना रहा है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में हाइडलबर्ग विश्वविद्यालय, जर्मनी से सेवानिवृत्त इतिहासकार एवं प्राध्यापक प्रो. गीता धर्मपाल तथा नवोदित लेखक डॉ. अंकुर कक्कड़ वक्ता के रूप में सम्मिलित हुए। प्रो. गीता धर्मपाल के अनुसार धर्मपाल द्वारा लिखे गये साहित्य को वर्तमान परिदृश्य में उचित एवं अनुकूल माध्यमों से पाठकगण तक पहुंचाना आवश्यक है, क्योंकि उनके विचार एवं शोध भारतीय शिक्षा पद्धति को एक नये एवं सकारात्मक दृष्टिकोण से परिभाषित करते हैं। उन्होंने धर्मपाल जी के जीवन एवं कृतित्व के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के बताये हुए रास्ते पर चलते हुए धर्मपाल जी ने भारत के स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद ही देश सेवा के लिए सतत् प्रयत्न किये और देश की अस्मिता और सुरक्षा के मध्य उत्पन्न होने वाली किसी भी बाधा को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाये।
विशेष वक्ता के रूप में हाइडलबर्ग वि.वि. जर्मनी के शोधार्थी डॉ. अंकुर कक्कड़ ने धर्मपाल द्वारा लिखित महत्तवपूर्ण पुस्तक ''दि ब्यूटीफूल ट्री'' में उल्लिखित विचारों तथा तथ्यों के अवलोकन में नई शिक्षा पद्धति के प्रावधानों पर तुलनात्मक चर्चा की। उन्होंने बताया कि धर्मपाल जी ने अंग्रेजों के आगमन के पूर्व भारत में प्रचलित जो प्राचीन शिक्षा पद्धति थी, वह अत्यंत समृद्ध थी तथा नई शिक्षा नीति में जिन विषयों को सम्मिलित किया गया है वह भी कहीं न कहीं ''दि ब्यूटीफूल ट्री'' में उल्लिखित हैं। लोक विद्या का प्रसार तथा शिक्षा के क्षेत्र में समानता जैसे प्रावधान पूर्व में भी भारत में मौजूद थे। इनका धर्मपाल ने प्रमाण सहित उल्लेख किया है। वेबिनार के समन्वयक डॉ. संजय स्वर्णकार ने कहा कि श्री धर्मपाल जी के समाज में किये कार्यों का आंकलन आज की परिस्थितियों में कैसे किया जाये ये कार्य भी जरूरी है। उन्होंने हमेशा औपनिवेशीकरण को चुनौती दी है। अपने विशाल कोष का निर्माण किया है। विभिन्न मौलिक प्रकाशनों में यह दिखता है। अतीत का पुर्नमूल्यांकन करने व भारतीय शिक्षा में उनके स्थायी योगदान पर ध्यान दिया जाना चाहिए। वेबिनार में देश के विभिन्न राज्यों से सहभागियों ने अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के अंत में धर्मपाल शोधपीठ के निदेशक श्री संजय यादव द्वारा आभार व्यक्त किया गया। वेबीनार का सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर सीधा प्रसारण किया गया।

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