पेट्रोल-डीजल पंप के लिये सिंगल विंडो से मिलेगी एनओसी

प्रमुख सचिव खाद्य श्री किदवई ने किया सॉफ्टवेयर का उद्घाटन  
भोपाल। प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्री फैज अहमद किदवई ने पट्रोल एवं डीजल पंप खोलने के लिये सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम सॉफ्टवेयर का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि इस एप के द्वारा पट्रोल एवं डीजल पंप खोलने के लिये आवेदकों के लिये 8 विभागों से अलग-अलग एनओसी प्राप्त करना होती थी, जिसके कारण मेन्यूअली मिलने वाली इस अनुमति में आवेदकों को लंबा इंतजार करना पड़ता था।
ऑनलाइन मिलेगा क्लीयरेंस : श्री किदवई ने बताया कि इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन की आवश्यकता नहीं होगी। इसके प्रत्येक चरण में संबंधित विभाग को समय-सीमा के बारे में एसएमएस और ई-मेल के द्वारा रिमाइंडर भेजे जा सकेंगे। आवेदन प्राप्त होने पर प्रत्येक विभाग पोर्टल में अपनी सहमति अपडेट करेगा। एक बार सभी विभागों की सहमति पोर्टल पर अपडेट होने के बाद कलेक्टर भी पोर्टल पर ही अपनी अंतिम रिपोर्ट सहमति/असहमति के रूप में दर्ज कराएंगे। एनओसी की हस्ताक्षरित प्रति उसके पश्चात सिस्टम में अपलोड की जायेगी। उन्होंने बताया कि डिजीटल सिग्नेचर से एनओसी जारी करने के लिये सॉफ्टवेयर को अपडेट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी तक रिटेल आउटलेट/रूरल रिटेल आउटलेट खोलने के लिये तेल कंपनियाँ आवेदन के साथ 8 प्रतियों में दस्तावेज आवेदक से प्राप्त कर एनओसी के लिये कलेक्टर के पास जमा कराती हैं। कलेक्टर द्वारा 8विभिन्न विभागों को प्रपत्र भेजकर उनकी अनापत्ति प्राप्त होने के बाद कलेक्टर अपनी अंतिम रिपोर्ट तेल कंपनी को भेजा करते हैं। इसमें कईं बार विभाग प्रश्नों के साथ या अतिरिक्त दस्तावेज जमा कराने के लिये आवेदन वापस भी भेज दिया करते थे। मेन्यूअली होने वाली इस पूरी प्रक्रिया में 3 से 4 माह का समय लग जाता था। एप के उपयोग से अब अतिशीघ्र एनओसी दी जा सकेगी। इंडियम ऑयल के कार्यकारी निदेशक एवं राज्य प्रमुख श्री वी. सतीश कुमार ने डिजीटल प्लेटफार्म विकसित करने के लिये अपने सुझाव रखे। इस अवसर पर प्रबंध संचालक नागरिक आपूर्ति निगम श्री अभिजीत अग्रवाल, श्री पदम पांडे सीजीएम, श्री निर्मल कुमार जाना जीएमआईटी एवं श्री पीयूष मित्तल भी उपस्थित थे।

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये