ऑक्सीजन संयंत्र के लिए निवेश प्रोत्साहन सहायता दी जाएगी : मुख्यमंत्री श्री चौहान

भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में निवेश संवर्धन के लिये आयोजित मंत्रिपरिषद समिति की बैठक में प्रदेश में होशंगाबाद जिले में मोहासा बावई इंडस्ट्रीयल एवं मेडिकल गैस निर्माण के लिए संयंत्र स्थापना पर निवेश प्रोत्साहन सहायता देने का निर्णय लिया गया है। समिति ने आइनॉक्स लिमिटेड को निवेश प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 40 प्रतिशत की दर से 7 वर्ष की अवधि में सहायता देने का निर्णय लिया। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में हाल ही में कोविड-19 के दौरान नागरिकों के उपचार के लिए राज्य सरकार ने पर्याप्त ऑक्सीजन व्यवस्था करने के साथ ही भविष्य में ऑक्सीजन के लिए अन्य राज्यों पर निर्भरता समाप्त करने के उद्देश्य से राज्य में ही संयंत्र स्थापना के लिए गंभीरता से विचार किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस संबंध में संबंधित विभागों को तेजी से कार्यवाही संपादित करने के निर्देश दिए थे।
औद्योगिक क्षेत्र मोहासा बावई में आइनॉक्स एयर प्रोडक्ट प्रा.लि. जो देश में औद्योगिक गैसों के निर्माण की अग्रणी कंपनी है, को राज्य शासन ने एम.पी.आईडीसी के माध्यम से विद्युत वितरण की अनुज्ञप्ति भी स्वीकृत की है। परियोजना को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने से इकाई स्थापना में सहयोग मिलेगा। कोविड-19 के दृष्टिगत प्रदेश में ऑक्सीजन की मांग के लिए 125 करोड़ के पूंजी निवेश से रोजाना 210 टन क्षमता के एयर सेप्रेशन प्लांट की स्थापना की प्रक्रिया चल रही है। परियोजना की स्थापना राज्य के आर्थिक विकास और ऑक्सीजन पूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आज संपन्न बैठक में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री श्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री ओमप्रकाश सखलेचा और श्री चिकित्सा शिक्षा, भोपाल गैस त्रासदी, राहत एवं पुनर्वास मंत्री श्री विश्वास सारंग वीडियो कान्फ्रेसिंग द्वारा शामिल हुए।

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये