जल्द मिलेगी खुशखबरी: मार्च तक लॉन्च हो सकते हैं कोरोना वैक्सीन के दो टीके

नई दिल्ली। देशवासियों को मार्च-2021 तक कोरोना वैक्सीन को लेकर बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। भारत सरकार को उम्‍मीद है कि तब तक फेज-3 ट्रायल पूरा हो जाएगा और एक्‍सपर्ट्स से क्लियरेंस भी मिल जाएगा। देश में कुल तीन कोविड टीकों का इंसानों पर ट्रायल हो रहे हैं। सरकार को लगता है कि इनमें से दो तो मार्च तक लॉन्‍च के लिए तैयार हो जाएंगे। पिछले हफ्ते तीन बड़े वैक्‍सीन निर्माताओं के साथ सरकार ने बैठक की है। इसमें वैक्‍सीन की उपलब्‍धता से लेकर उसके रेगुलेटरी अप्रूवल, डिस्‍ट्रीब्‍यूशन की चुनौतियों पर बात हुई। अगर सबकुछ ठीक रहा तो ये कंपनियां मार्च तक वैक्‍सीन लॉन्‍च कर सकती हैं। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हर्षवर्धन कह चुके हैं कि सरकार जुलाई 2021 तक 40-50 करोड़ डोज हासिल करने की योजना बना रही है। आइए जानते हैं वो कौन सी तीन कोरोना वैक्‍सीन हैं जिनमें से दो के मार्च तक लॉन्‍च होने की उम्‍मीद है।
कोविशील्‍ड है रेस में सबसे आगे
किसने बनाई: ऑक्‍सफर्ड यूनिवर्सिटी- अस्‍त्राजेनेका
सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने इसे भारत में लाने के लिए अस्‍त्राजेनेका से करार किया है।
किस तरह की वैक्‍सीन: नॉन-रेप्लिकेटिंग वायरल वेक्‍टर वैक्‍सीन
ह्यूमन ट्रायल स्‍टेटस: फेज 2
संभावित कीमत: SII के सीईओ अदार पूनावाला के मुताबिक, शुरुआत में कोविशील्‍ड की कीमत 1,000 रुपये के आसपास हो सकती है। निम्न और मध्यम आय श्रेणी में आने वाले देशों (LMICs) में महज 3 डॉलर (करीब 225 रुपये) में उपलब्ध करवाया जाएगा।

स्‍वदेशी कोवैक्सिन से पूरे देश को उम्‍मीदें
किसने बनाई: ICMR-NIV और भारत बायोटेक
किस तरह की वैक्‍सीन: इनऐक्टिवेटेड वायरस वैक्‍सीन
ह्यूमन ट्रायल स्‍टेटस: फेज 2
संभावित कीमत: भारत बायोटेक के एमडी डॉ कृष्‍णा एल्‍ला के अनुसार, वैक्‍सीन की कीमत एक बोतल की कीमत से भी कम होगी। यानी इसका मतलब कीमत 100 रुपये से खासी कम हो सकती है। हालांकि फाइनल कीमत का पता रेगुलेटरी अप्रूवल के बाद ही चल पाएगा।

जायडस कैडिला वैक्‍सीन भी रेस में
किसने बनाई: जायडस कैडिला
किस तरह की वैक्‍सीन: DNA बेस्‍ड वैक्‍सीन
ह्यूमन ट्रायल स्‍टेटस: फेज 2
संभावित कीमत: कंपनी ने कीमत को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं रखी है। लेकिन बाकी डेवलपर्स की तरह जायडस कैडिला भी वैक्‍सीन के दाम 1,000 रुपये से कम रख सकता है।

जुलाई तक 25 करोड़ लोगों को टीके लगाने का प्‍लान
केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ हर्षवर्धन के मुताबिक, सरकार जुलाई 2021 तक 20-25 करोड़ लोगों को टीका लगाने का प्‍लान कर रही है। उन्‍होंने रविवार को कहा था कि तब तक 40-50 करोड़ डोज हासिल हो जाएंगे। कोविड वैक्‍सीन की डबल डोज लगेगी यानी इतने से 20-25 करोड़ लोगों को टीका लग जाएगा। सरकार वैक्‍सीन के भंडारण और टीकाकरण की प्रक्रिया को लेकर फ्रेमवर्क तैयार करने के अंतिम चरण में है। शुरुआती डोज डॉक्‍टर्स, नर्सेज, पैरामेडिक्‍स जैसे हेल्‍थकेयर वर्कर्स को मिलेगी।

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये