उपचुनाव में कांग्रेस-भाजपा का गणित बिगाड़ने में जुटी बहुजन समाज पार्टी

भोपाल। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि यूपी में विधान परिषद चुनावों में समाजवादी पार्टी को हराने के लिए उनकी पार्टी बीजेपी से भी हाथ मिला सकती है। स्पष्ट है कि बसपा बीजेपी-विरोधी पार्टियों का खेल खराब करने की रणनीति पर काम कर रही है। मध्य प्रदेश में 28 सीटों पर हो रहे उपचुनावों में भी मायावती की पार्टी कमोबेश इसी रणनीति पर काम कर रही है। उपचुनावों के लिए बसपा ने जिन सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं, उन पर वे कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए मुसीबत बन सकते हैं। उपचुनाव की 28 में से 16 सीटें ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की हैं, जहां पहले से ही बीएसपी का प्रभाव ज्यादा है। 2018 के विधानसभा चुनाव में बसपा को जिन दो सीटों पर जीत मिली थी, वे भी इसी क्षेत्र की हैं। इसके अलावा कई सीटों पर उसके उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे थे। बसपा ने 28 में से 27 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं जो बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस की वोटों में सेंधमारी कर सकते हैं।
2018 के विधानसभा चुनाव में ग्वालियर-चंबल संभाग की 15 सीटों पर बसपा को निर्णायक वोट मिले थे। दो सीटों पर उसके प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे, जबकि 13 सीटों पर बसपा प्रत्याशियों को 15 हजार से लेकर 40 हजार तक वोट मिले थे। ग्वालियर-चंबल की जिन सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं, उनमें से मेहगांव, जौरा, सुमावली, मुरैना, दिमनी, अंबाह, भांडेर, करैरा और अशोकनगर में पहले बसपा जीत दर्ज कर चुकी है। 2018 में मुरैना में बीजेपी प्रत्याशी की हार में बसपा की मौजूदगी प्रमुख कारण था। इसके अलावा पोहरी, जौरा, अंबाह में बसपा के चलते बीजेपी तीसरे नंबर पर पहुंच गई थी। उसकी मौजूदगी से इनमें से अधिकांश सीटों पर उपचुनावों में भी मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है। 2018 के विधानसभा चुनावों से पहले एससी-एसटी एक्ट को लेकर हुए आंदोलन के चलते माहौल बीजेपी के खिलाफ था। इसलिए, बसपा को मिले वोट कांग्रेस की जीत में मददगार साबित हुए थे, लेकिन इस बार माहौल पूरी तरह अलग है। ग्वालियर-चंबल में कांग्रेस के सबसे बड़े नेता रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया अब बीजेपी के साथ हैं। एससी-एसटी एक्ट जैसा कोई मुद्दा भी नहीं है। इसलिए, बीएसपी को मिलने वाले वोट बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।

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