17वीं लोकसभा अभी से इतिहास में दर्ज: मोदी

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि 16वीं लोकसभा का कार्यकाल देश की प्रगति के लिए बहुत ही ऐतिहासिक रहा जबकि अपने निर्णयों के कारण 17वीं लोकसभा का कार्यकाल अभी से इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगली लोकसभा भी देश को नए दशक में आगे ले जाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने ये बातें सांसदों के लिए राजधानी दिल्ली के डॉ बीडी मार्ग पर बनाए गए बहुमंजिला फ्लैटों का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में कही। वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से आयोजित इस उद्घाटन समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय शहरी आवास मंत्री हरदीप सिंह पुरी, संसदीय कार्यमंत्री प्रल्हाद पटेल और संसद की आवास समिति के अध्यक्ष सी आर पाटिल भी शामिल हुए। मोदी ने कहा कि सामान्य तौर पर यह कहा जाता है कि युवाओं के लिए 16, 17, 18 साल की उम्र बहुत महत्वपूर्ण होती है और ठीक उसी प्रकार 16, 17, 18 की ये उम्र किसी युवा लोकतंत्र के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘‘2019 के चुनाव के साथ ही हमने 16वीं लोकसभा का कार्यकाल पूरा किया है। यह समय देश की प्रगति के लिए, देश के विकास के लिए बहुत ही ऐतिहासिक रहा है। 2019 के बाद से 17 वीं लोकसभा का कार्यकाल शुरू हुआ है। इस दौरान भी देश ने जैसे निर्णय लिए हैं, जो कदम उठाए हैं, उनसे यह लोक सभा अभी से ही इतिहास में दर्ज हो गई है।’’ प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि 18 वीं लोकसभा भी देश को नए दशक में आगे ले जाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘16वीं, 17वीं और 18वीं लोकसभा का कालखंड हमारे युवा देश के लिए बहुत अहम है। देश के लिए इस महत्वपूर्ण समय का हम सबको हिस्सा बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। हम सबकी जिम्मेदारी है जब इतिहास में लोकसभा के अलग-अलग कार्यकालों का अध्ययन किया जाए तो ये कार्यकाल देश की प्रगति के स्वर्णिम अध्याय के तौर पर याद किया जाएं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘देश के सामने इतना कुछ है जो हमें इस दौरान हासिल करना है। ’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि 16वीं लोकसभा में 60 प्रतिशत ऐसे बिल रहे हैं जिन्हें पास करने के लिए औसतन दो से तीन घंटे तक की बहस हुई जबकि पिछली लोकसभा से ज्यादा बिल पास किए, लेकिन पहले से ज्यादा चर्चा की है। उन्होंने कहा, ‘‘ये दिखाता है कि हमने उत्पाद पर भी फोकस किया है और प्रक्रिया को भी निखारा है।’’ प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पिछले डेढ़ साल में सरकार की ओर से उठाए गए कमदों का जिक्र किया और कहा कि इस दौरान जहां जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मुक्त कराया गया वहीं तीन तलाक जैसी प्रथा को समाप्त किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ बीते एक डेढ़ वर्ष की बात करें तो देश ने किसानों को बिचौलियों के चंगुल से आजाद कराने का काम किया है, ऐतिहासिक लेबर रिफॉर्म्स किये हैं, कामगारों के हितों को सुरक्षित किया है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों से चली आ रही समस्याएं, टालने से नहीं, उनका समाधान खोजने से समाप्त होती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ सांसदों के निवास ही नहीं, बल्कि यहां दिल्ली में ऐसे अनेकों प्रोजेक्ट्स थे, जो कई-कई बरसों से अधूरे थे।’’ इस कड़ी में उन्होंने अंबेडकर नेशनल मेमोरियल, केंद्रीय सूचना आयसोग की इमारत, वॉर मेमोरियल और पुलिस मेमोरियल का उल्लेख किया।

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये