उचित मूल्य दुकान और सतर्कता समितियों को वेबिनार के माध्यम से 18 दिसंबर को दिया जाएगा प्रशिक्षण : प्रमुख सचिव किदवई

भोपाल। शासकीय उचित मूल्य दुकानों की निगरानी के लिए गठित सतर्कता समितियों को ओर अधिक सुदृढ़ करने की दृष्टि से समिति सदस्यों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जायेगा। प्रमुख सचिव खाद्य श्री फैज अहमद किदवई ने बताया कि 18 दिसंबर को प्रात: 11 बजे से 1 बजे तक आयोजित इस वेबिनार की अध्यक्षता खाद्य मंत्री श्री बिसाहूलाल सिंह करेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत गठित उचित मूल्य दुकान सतर्कता समितियों को प्रदेश में पहली बार ऑन लाईन प्रशिक्षण दिया जाएगा।
श्री किदवई ने बताया कि इस प्रशिक्षण में प्रदेश की 22 हजार 824 पंचायतें भाग लेंगी। एक समिति के लगभग 12 से 14 सदस्य शामिल होंगे। इस तरह लगभग 3 लाख 20 हजार प्रशिक्षाणर्थी इसमें एक साथ अपने-अपने क्षेत्र में रहकर भाग ले सकेंगे। इनमें उचित मूल्य दुकान मुख्यालय की पंचायत स्तर पर गठित सतर्कता समिति के अध्यक्ष, सह-अध्यक्ष (दुकान में एक से ज्यादा पंचायत होने पर) पंचायत सचिव, सदस्य सचिव एवं अन्य पात्रता पर्चीधारी सदस्यगण भाग ले सकेंगे। इसके साथ ही इस प्रशिक्षण में सतर्कता समिति के साथ संबंधित 20 हजार 859 उचित मूल्य दुकान विक्रेता भी संबंधित पंचायत से शामिल होंगे। श्री किदवई ने बताया कि पंचायत स्तर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी एवं ग्राम पंचायत सचिव द्वारा प्रतिभागियों को कार्यक्रम से अवगत कराया जाएगा। इसके अलावा प्रशिक्षण स्थल पर वांछित तकनीकी व्यवस्था यथा कम्प्यूटर, माईक, इंटरनेट आदि की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जायेंगी। एन आई सी द्वारा पृथक से इसके लिए लिंक उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदेश में प्रथम बार आयोजित इस ऑनलाइन प्रशिक्षण की व्यवस्था निगरानी ग्रामीण विकास विभाग, महिला एवं बाल विकास, पंचायत, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं खाद्य विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से करेंगे। प्रशिक्षण का सीधा प्रसारण प्रदेश की प्रत्येक पंचायत, मुख्यालय पर किया जाएगा। कार्यक्रम में कुछ चुनिंदा प्रतिभागियों से चर्चा भी की जायेगी। उनके प्रश्नों का समाधान इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में किया जाएगा।

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये