भारत में होगा रूसी कोरोना वैक्सीन का निर्माण, बनेंगे स्पूतनिक व्ही के 30 करोड़ डोज

मास्को। दुनियाभर में कोरोन वायरस वैक्सीन के टीकाकरण के बीच रूस ने ऐलान किया है कि वह अपनी वैक्सीन का निर्माण भारत में करेगा। रूस ने यह भी कहा है कि 2021 से भारत में हर साल करीब 30 करोड़ वैक्सीन की डोज का उत्पादन किया जाएगा। इसके लिए रूस ने भारत की चार प्रमुख वैक्सीन निर्माता कंपनियों से बातचीत भी कर ली है। बता दें कि वैक्सीन की सफलता की घोषणा के समय ही रूस ने कहा था कि वह अपनी वैक्सीन का निर्माण भारत में करेगा। रशियन डॉयरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड के प्रमुख किरील दिमित्रेव ने कहा है कि 2021 में भारत रूसी कोरोना वैक्सीन के करीब 30 करोड़ डोज का निर्माण करेगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमने भारत के चार प्रमुख वैक्सीन निर्माता कंपनियों से संपर्क किया है। भारत अगले साल से 30 करोड़ या इससे ज्यादा भी वैक्सीन के डोज का निर्माण कर सकता है।
रूस का दावा- 91 फीसदी से ज्यादा कारगर है उनकी वैक्सीन रूस की कोरोना वायरस वैक्सीन स्पुतनिक वी को बनाने वाली कंपनी ने कुछ दिन पहले ही दावा किया था कि यह वायरस के खिलाफ 91.5 फीसदी कारगर है। कंपनी ने बताया कि वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल के डेटा के तीन फाइनल कंट्रोल पॉइंट एनालिसिस करने के बाद यह रिजल्ट सामने आया है। पहले कंट्रोल पॉइंट में वैक्सीन का 92 फीसदी प्रभाव दिखा, जबकि दूसरे कंट्रोल पॉइंट में यह आंकड़ा 91.4 फीसदी आया। इसे बनाने वाली कंपनी गामलेया रिसर्च सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी ने दावा किया है कि वैक्सीन ने कोरोना वायरस के गंभीर मामलों के खिलाफ 100 प्रतिशत प्रभावकारिता दिखाई है। कंपनी के अनुसार, वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल का डेटा जल्द ही प्रतिष्ठित साइंस जर्नल्स में प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद दुनियाभर के देशों में स्पुतनिक वी वैक्सीन के त्वरित पंजीकरण के लिए एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
रूस की वैक्सीन सामान्य सर्दी जुखाम पैदा करने वाले adenovirus पर आधारित है। इस वैक्सीन को आर्टिफिशल तरीके से बनाया गया है। यह कोरोना वायरस SARS-CoV-2 में पाए जाने वाले स्ट्रक्चरल प्रोटीन की नकल करती है जिससे शरीर में ठीक वैसा इम्यून रिस्पॉन्स पैदा होता है जो कोरोना वायरस इन्फेक्शन से पैदा होता है। यानी कि एक तरीके से इंसान का शरीर ठीक उसी तरीके से प्रतिक्रिया देता है जैसी प्रतिक्रिया वह कोरोना वायरस इन्फेक्शन होने पर देता लेकिन इसमें उसे COVID-19 के जानलेवा नतीजे नहीं भुगतने पड़ते हैं। मॉस्को की सेशेनॉव यूनिवर्सिटी में 18 जून से क्लिनिकल ट्रायल शुरू हुए थे। 38 लोगों पर की गई स्टडी में यह वैक्सीन सुरक्षित पाई गई है। सभी वॉलंटिअर्स में वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी भी पाई गई। इस वैक्सीन का नाम रूस की पहली सैटेलाइट स्पुतनिक से मिला है। जिसे रूस ने 1957 में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ने लॉन्च किया था। उस समय भी रूस और अमेरिका के बीच स्पेस रेस चरम पर थी। कोरोना वायरस वैक्सीन के विकास को लेकर अमेरिका और रूस के बीच प्रतिद्वंदिता चल रही है। रूस के वेल्थ फंड के मुखिया किरिल दिमित्रीव ने वैक्सीन के विकास की प्रक्रिया को 'स्पेस रेस' जैसा बताया था। उन्होंने US TV को बताया, 'जब अमेरिका ने Sputnik (सोवियत यूनियन की बनाई दुनिया की पहली सैटलाइट) की आवाज सुनी तो वे हैरान रह गए, यही बात वैक्सीन के साथ है।

 

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये