ब्रिटेल में मिला कोरोना का नया रूप, खौफ में पूरी दुनिया, यूके से भारत आने वाली फ्लाइटस 31 तक बेन

नई दिल्‍ली। ब्रिटेन में कोरोना वायरस का नया रूप सामने आने के बाद भारत सरकार ने ऐहतियाती कदम उठाए हैं। यूनाइटेड किंगडम से भारत आने वाली सभी फ्लाइट्स 22 दिसंबर की रात 11.59 बजे से लेकर 31 दिसंबर की रात 11.59 बजे तक स्‍थगित रहेंगी। सरकार ने यह कदम यूके में नए स्‍ट्रेन के सामने आने से उपजे हालात को देखते हुए लिया है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने इसे लेकर एक उच्‍चस्‍तरीय बैठक बुलाई थी। जिसके बाद यूके से आने वाले उड़ानों पर अस्‍थायी रोक लगाने का फैसला हुआ। दिल्‍ली और राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्रियों ने भी केंद्र से ऐसा फैसला करने को कहा था। ऐहतियात के तौर पर, सभी ट्रां‍जिट फ्लाइट्स में यूके से आने वाले यात्रियों को एयरपोर्ट्स पर अनिवार्य रूप से टेस्‍ट कराना होगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यह फैसला कोविड के नए स्‍ट्रेन को भारत में फैलने से रोकने के लिए किया है। 22 दिसंबर की रात 11.59 बजे से पहले टेकऑफ कर चुकी फ्लाइट्स या उससे पहले टेकऑफ करने वाली फ्लाइट्स के यूके पैसेंजर्स को भारत में RT-PCR टेस्‍ट कराना होगा।
कोविड-19 वायरस के इस नए रूप का दक्षिण-पूर्व इंग्लैंड और लंदन में मामलों में भारी योगदान देखा गया है। इसी के बाद, स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने अपने शीर्ष सलाहकारों की एक आपात बैठक बुलाई थी। इस संयुक्त निगरानी समूह की अध्यक्षता स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक ने की। आपातकालीन बैठक में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधि और अन्य लोग शामिल हुए। ब्रिटेन और अमेरिका के हेल्‍थ एक्‍सपर्ट्स के मुताबिक, नया स्‍ट्रेन बाकियों के मुकाबले जल्‍दी संक्रमित करता है लेकिन अभी इसके सबूत नहीं है कि ये ज्‍यादा घातक है। ब्रिटिश सरकार के मुख्‍य वैज्ञानिक सलाहकार पैट्रिक वलांस ने कहा कि स्‍ट्रेन 'तेजी से फैलता है और प्रमुख वैरियंट बनता जा रहा है।' दिसंबर में लंदन के भीतर 60% से ज्‍यादा इंन्‍फेक्‍शंस इसी स्‍ट्रेन से फैले। चिंता की एक बड़ी वजह यह है कि इस स्‍ट्रेन के कई म्‍यूटेशंस हैं- करीब दो दर्जन की पहचान हो चुकी है। कुछ म्‍यूटेशंस तो उस स्‍पाइक प्रोटीन पर हैं जिनका इस्‍तेमाल वायरस कोशिकाओं से जुड़ने और उन्‍हें संक्रमित करने के लिए करता है। जो वैक्‍सीन बनी हैं, वे स्‍पाइक को ही निशाना बनाती हैं।

टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये