महिलाओं का सशक्तिकरण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : शिवराज सिंह चौहान

भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि महिलाओं का सशक्तिकरण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रदेश में अधिक से अधिक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ा जाए तथा स्व-सहायता समूहों को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए। यह प्रसन्नता का विषय है कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बैंक लिंकेज पोर्टल पर प्रकरणों की प्रस्तुति एवं उनकी स्वीकृति की दृष्टि से मध्यप्रदेश भारत में प्रथम रहा है। मध्यप्रदेश के प्रस्तुत 82 हजार 342 महिला स्व-सहायता समूहों के प्रकरणों में से 32 हजार 62 एस.एच.जी. के प्रकरण स्वीकृत किए गए हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि महात्मा गांधी नरेगा के क्रियान्वयन में भी मध्यप्रदेश भारत में प्रथम आया है। मध्यप्रदेश में इस वर्ष मनरेगा के अंतर्गत अभी तक 22810 ग्राम पंचायतों में से 22108 (97%) ग्राम पंचायतों में सक्रिय 01 करोड़ 14 लाख 66 हजार सक्रिय मजदूरों में से 20 लाख 17 हजार 56 (17.59%) मजदूरों को प्रतिदिन नियोजित किया जा रहा है, जो भारत में सर्वाधिक है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस उपलब्धि के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को बधाई दी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के क्रियान्वयन में भी दिए गए लक्ष्य की पूर्ति में मध्यप्रदेश प्रथम रहा है। प्रदेश में मार्ग निर्माण की लंबाई के 2550 कि.मी. के लक्ष्य के विरूद्ध 1010 कि.मी. मार्ग निर्माण किया गया जो लक्ष्य का 39.62 प्रतिशत है तथा भारत में सर्वाधिक है। मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण द्वारा ग्रीन टैक्नोलॉजी के अंतर्गत प्लास्टिक वेस्ट से सर्वाधिक लंबाई 7.5 हजार कि.मी. के मार्ग निर्मित किए गए। इस कार्य में मध्यप्रदेश भारत में प्रथम रहा है। ई-मार्ग पोर्टल के माध्यम से कार्यों के भुगतान में भी मध्यप्रदेश प्रथम रहा है। पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क प्राधिकरण के 2370 कार्यों में से 2166 का भुगतान प्रारंभ किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना में भी मध्यप्रदेश में अच्छा कार्य हुआ है। इसमें मध्यप्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में 23 लाख 63 हजार 777 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए, जिनमें से 17 लाख 59 हजार 675 आवास पूर्ण कर लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में अधिक से अधिक समरस पंचायतें हों, ऐसे प्रयास किए जाएं। इसके लिए अभियान चलाया जाए। इनमें सरपंच निर्विरोध चुने जाते हैं, जिससे चुनाव में व्यय होने वाली राशि ग्राम के विकास में खर्च होती है। शासन द्वारा समरस पंचायतों को विकास के लिए अतिरिक्त राशि भी प्रदान की जाती है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों की मॉनीटरिंग के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर दीनदयाल अंत्योदय समितियों को सक्रिय किया जाए। इनमें सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा गैर राजनैतिक व्यक्तियों को शामिल किया जाए।

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये