फसल उत्पादकता वृद्धि के लिये कीट और बीमारियों पर नियंत्रण जरूरी : मंत्री श्री पटेल

भोपाल। किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री श्री कमल पटेल ने कहा कि फसलों के उत्पादन को निरंतर बढ़ाये रखने के लिये विभिन्न कीटों और फसल संबंधी बीमारियों पर नियंत्रण रखना अत्यावश्यक है। एकीकृत कीट प्रबंधन और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन के द्वारा एग्रो केमिकल्स का विवेकपूर्ण उपयोग कर हम न केवल उत्पादन को बढ़ा सकते हैं बल्कि पर्यावरण को भी प्रतिकूल प्रभाव से बचा सकते हैं। मंत्री श्री पटेल संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन द्वारा परिकल्पित वर्ष 2020 को अंतर्राष्ट्रीय फसल स्वास्थ्य वर्ष  के उत्सव पर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में ”फसल स्वास्थ्य प्रबंधन-एक भारतीय कहानी” के विमोचन अवसर पर हरदा के बारंगा से ऑनलाइन संबोधित कर रहे थे। पुस्तक का विमोचन केन्द्रीय मंत्री श्री नितिन गढ़करी ने किया।
मंत्री श्री पटेल ने कहा कि स्वस्थ फसलें हानिकारक एग्रो केमिकल्स के बगैर कीटों और रोगों से सुरक्षित रहती हैं। विभिन्न प्रकार के जैव रासायनिक पदार्थों और अन्य एग्रो केमिकल्स के सुसंगत तरीके से एकीकृत उपयोग से फसलों की उत्पादकता को बढ़ाया जाता है। बेहतर कृषि पद्धतियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। प्रदेश में कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिकों के सतत मार्गदर्शन में प्रदेश के उन्नत किसान कृषि उत्पादन का कार्य कर रहे हैं। छोटे किसान भी कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के साथ मिलकर निरंतर कार्य कर रहे हैं। इसी का परिणाम है कि मध्यप्रदेश ने कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। मध्यप्रदेश ने 2013 में पहली बार ‘कृषि कर्मण पुरस्कार‘ प्राप्त किया। यह क्रम निरंतर जारी है। गेहूँ उत्पादन की श्रेणी में मध्यप्रदेश लगातार पांच बार ‘कृषि कर्मण अवार्ड‘ हासिल कर चुका है।
मंत्री श्री पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश आज दलहन के साथ तिलहन में भी सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। इस वर्ष गेहूँ उर्पाजन में प्रदेश ने नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए पंजाब को पीछे छोड़ा और मध्यप्रदेश देश का नया खाद्य उत्पादन केन्द्र बन गया है। मंत्री श्री पटेल ने ”फसल स्वास्थ्य प्रबंधन-एक भारतीय कहानी” के लेखकों डॉ. सी.डी. मायी और उनके सहयोगी श्री गोविंद गुर्जर, सुश्री यशिका कपूर और श्री भागीरथ चौधरी को बधाई और शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि निश्चित ही यह पुस्तक किसानों को उत्पादन बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। वेबिनार में शामिल कृषि विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

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