जैविक आदानों की आपूर्ति के लिए कृषि विश्वविद्यालय आगे आएं: राज्यपाल श्रीमती पटेल

भोपाल। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि जैविक आदानों की आपूर्ति के लिए कृषि विश्वविद्यालय आगे आएं। कृषि विश्वविद्यालय किसानों को जैविक बीज, खाद और कीटनाशक उपलब्ध कराने की कार्ययोजना पर अमल करें।  उन्होंने कहा कि किसानों को जैविक आदानों की आपूर्ति की आवश्यकता का संकलन किया जाए। उसके अनुसार आगामी दो-तीन वर्षो में आपूर्ति की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों से कहा कि उन्नत जैविक खाद्यान्न, खाद और कीटनाशकों का उत्पादन किसानों के खेतों पर कराएं ताकि आसपास के अन्य किसान भी जैविक उत्पादन के लिए प्रेरित हों। श्रीमती पटेल आज पंवारखेड़ा होशंगाबाद में आयोजित जैविक उन्नत कृषि कार्यक्रम में किसानों को संबोधित कर रहीं थी। इस अवसर पर मंत्री किसान कल्याण एवं कृषि विकास श्री कमल पटेल भी मौजूद थे।
राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कहा कि रसायनिक खादों के उपयोग से होने वाले उत्पाद स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। उन्होंने कहा कि यदि आंकड़े लिए जाएं तो कैंसर से मरने वालों की संख्या किसी अन्य संक्रमण से होने वाली मौतों से अधिक होगी। उन्होंने कहा कि विकास के लिए एकीकृत दृष्टि के साथ प्रयास किये जाना जरूरी है। गोबर से जैविक खाद, कीटनाशक और पोषक तत्वों का सफल उत्पादन गुजरात में हो रहा है। उत्तरप्रदेश में भी 10 हजार गायों के गोबर से जैविक उत्पादों के उत्पादन की परियोजना शुरू हुई है। उन्होंने विकास के लिए खाकों में नहीं एकीकृत प्रयासों की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि गाँवो के समग्र विकास की सोच के साथ कार्य किया जाए तो अनेक समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। उन्होंने कुपोषण की समस्या का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसान थोड़ी सी सब्जी आँगनबाड़ी और मध्यान्ह भोजन में देने लगे तो बच्चों को पौष्टिक भोजन मिलने लगेगा। उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं।  उनके स्वास्थ्य के लिए महिलाओं, बेटियों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना होगा क्योंकि स्वस्थ माँ से स्वस्थ बच्चे का जन्म होगा। उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए उनके आर्थिक स्वावलंबन पर विशेष बल दिया और कहा कि महिला स्व-स्हायता समूह इसका सफल तरीका है। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कार्यक्रम स्थल पर जैविक कृषि उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कृषको से संवाद कर, उन्हें उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर विक्रय के लिए प्रेरित किया। जैविक उत्पादों की गुणवत्ता की सराहना करते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के बजाय अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर विक्रय के लिए प्रोत्साहित किया।
मंत्री किसान कल्याण एवं कृषि विकास श्री कमल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाया है। उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर नहीं, अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर फसल बेचने  का अधिकार दिया है। उन्होंने कहा कि अभी तक उत्पादक किसान बहुत थे, मगर खरीददार व्यापारी थोड़े से होने के कारण फसल का सही मूल्य नहीं मिल पाता था। अब किसान स्वयं अपने उत्पादन को बेचने में सक्षम हो गया है। वह खाद्यान्न उत्पादक संघ बनाकर अधिकतम खुदरा मूल्य प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि स्वामित्व योजना से आजादी के 70 सालों के बाद किसानों को आबादी की जमीन का अधिकार मिल रहा है। अब वह भी अपनी संपत्ति के आधार पर बैंको से ऋण लेकर अपना व्यवसाय खड़ा कर सकता है। श्री पटेल ने कहा कि रासायनिक आदानों के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी जहरीली हो गई है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी उसी का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि भूमि के उपचार की जरूरत है। इसलिए सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों में कार्यालयीन समय में भूमि उपचार के लिए बहिरंग व्यवस्था (ओपीडी) चलाई जायेगी। कृषि वैज्ञानिक गाँवो में जाकर चौपाल लगाकर किसानों को परामर्श देंगे, इसके लिए टोल फ्री हैल्प लाइन भी संचालित की जाएगी। उन्होंने कहा कि जैविक खेती भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य का आधार है। कार्यक्रम में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति श्री पी.के. बिसेन ने बताया कि पंवारखेड़ा कृषि अनुसंधान केन्द्र की स्थापना वर्ष 1903 में हुई है। इस अवधि में केन्द्र द्वारा 53 उन्नत गेहूं की किस्मों का आविष्कार किया है। उन्होंने किसानों से नरवाई नहीं जलाने की अपील करते हुए कहा कि केन्द्र से बायो डाइजेस्टर प्राप्त कर नरवाई को 15 दिनों में जैविक खाद में बदला जा सकता है।
कार्यक्रम में रेशम विभाग द्वारा रेशम उत्पादन तकनीक का, उद्यानिकी विभाग द्वारा जैविक उत्पाद का, कृषि विभाग द्वारा कृषि जैविक उत्पाद एवं जैविक उत्पादन तकनीक का, मछली पालन विभाग द्वारा मछली उत्पादन तकनीक और योजनाओं का, कृषि विज्ञान केन्द्र गोविंदनगर बनखेड़ी द्वारा जैविक कृषि एवं उद्यानिकी और गौ आधारित कृषि उत्पादन, बांस और माटीकलां का, कृषि विज्ञान केन्द्र हरदा, नरसिंहपुर, बैतूल तथा कृषि महाविद्यालय पवारखेड़ा द्वारा जैविक कृषि एवं कृषि आधारित उत्पाद का, पशुपालन विभाग द्वारा पशु पालन कार्यक्रम एवं विभागीय योजनाओं का जैविक कृषि फार्म किसानों द्वारा जैविक उत्पाद का और कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा उन्नत कृषि यंत्रो का प्रदर्शन किया गया था। इस अवसर पर विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष श्री सीतासरन शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री कुशल पटेल भी मौजूद थे।

 

टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये