सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कानून बनाने के लिए हम निर्देश जारी नहीं कर सकते, यह संसद का काम

नई दिल्ली। बेनामी संपत्ति जब्त करने संबंधित कानून बनाने का निर्देश देने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह विधायिका का रोल नहीं ले सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कानून बनाए जाने को लेकर दाखिल पीआईएल पर सुनवाई से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा गया था कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह ब्लैक मनी और आय से अधिक संपत्ति और बेनामी संपत्ति को जब्त करने केलिए कानून बनाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संसद का काम है कानून बनाए। हम इसके लिए आदेश नहीं दे सकते। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसके कौल की अगुवाई वाली बेंच ने याचिकाकर्ता व बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय को इस बात की इजाजत दी है कि वह लॉ मिनिस्ट्री के सामने इस बारे में रिप्रजेंटेशन दे सकते हैं ताकि इस बात की संभावना देखी जा सके कि क्या अवैध संपत्ति या ब्लैक मनी को जब्त करने के लिए मौजूदा कानून में सशोधन हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम दो बातें बताना चाहते हैं। विधायिका और कार्यपालिका है और जूडिशियरी को स्क्रूटनी करनी है। आप जूडिशियल विंग को नहीं कह सकते कि वह तमाम रोल को अपने हाथों में ले ले। अदालत ने कहा कि संविधान इसकी परिकल्पना नहीं करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अश्विनी उपाध्याय के अच्छे पीआईएल की सराहना की और कहा कि आपने कई अच्छे पीआईएल दाखिल किए हैं लेकिन साथ ही कहा कि ये पीआईएल पब्लिसिटी इंट्रेस्ट लिटिगेशन है। अदालत ने कहा सॉरी ये पब्लिसिटी इंट्रेस्ट लिटिगेशन है। आपने कुछ अच्छे काम किए हैं लेकिन इस अर्जी पर विचार नहीं हो सकता। अश्विनी उपाध्याय के वकील गोपाल शंकर नारायणन ने ब्लैक मनी और बेनामी संपत्ति का मुद्दा उठाया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट में कुछ सालों पहले राम जेठमलानी ने भी यही मुद्दा उठाया था। कोल ब्लॉक घोटाला एक लाख करोड़ का था लेकिन सजा तीन साल की हुई है। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संसद को कानून बनाना है हम इसके लिए निर्देश जारी नहीं कर सकते कि सरकार कानून बनाए। इन बातों के लिए कोर्ट आने की प्रवृति ठीक नहीं है। आप अपनी गुहार देखें। ये काम कोर्ट का नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस बात की इजाजत दे दी कि वह अर्जी वापस कर सकते हैं और लॉ मिनिस्ट्री के सामने रिप्रजेंटेशन दे सकते हैं।

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये