आगामी तीन वर्षों में देश का सर्वाधिक विकसित राज्य बनेगा मध्यप्रदेश : लोक निर्माण मंत्री श्री भार्गव

भोपाल। लोक निर्माण मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने कहा कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की थीम के माध्यम से आगामी तीन वर्षों में मध्यप्रदेश देश का सर्वाधिक विकसित राज्य बनेगा। इसमें सुदृढ़ अधोसंरचना के साथ औद्योगिक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। मंत्री श्री भार्गव ने यह बात कॉन्फ्रेडेरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज द्वारा मिंटो हॉल भोपाल में आयोजित मध्यप्रदेश इन्फ्रास्ट्रेक्चर कॉनक्लेव के शुभारंभ अवसर पर कहीं। मंत्री श्री भार्गव ने कहा कि प्रदेश ने वर्ष 2003 के बाद अधोसंरचना के साथ-साथ कृषि, सिंचाई, औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित किए हैं। लेकिन विकास एक सतत् प्रक्रिया है। नई तकनीकों के ईजाद हो जाने पर संसाधनों को बेहतर बनाने का क्रम लगातार जारी रहता है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का विजन देश को दिया तो उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में 'आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश' का रोड़मेप तैयार किया गया और इस पर तेजी से काम भी प्रारंभ हो गया है। श्री भार्गव ने कहा कि प्रशंसा का विषय है कि सभी विभागों को दिए गये 30 दिवस (एक माह) के लक्ष्य की पूर्ति की जा चुकी है। अगला लक्ष्य 90 दिवस (3 माह) और 3 वर्ष का है। वर्ष 2023 तक मध्यप्रदेश में सभी लक्ष्यों की पूर्ति कर ली जायेगी।
मंत्री श्री भार्गव ने कहा कि औद्योगिक विकास गतिविधियों के साथ-साथ औद्योगिक संस्थाओं को सामाजिक क्षेत्र में काम करने की जरूरत है। नागरिकों में भी अपने सामाजिक दायित्व बोध जगाने की आवश्ययकता है। तभी हम आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश से आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने वर्चुअल कॉनक्लेव के माध्यम से सम्मिलित हो रहे उद्योगपतियों से प्रदेश के विकास में खुले दिल से भागीदारी दर्ज कराने की अपील की। अपर मुख्य सचिव एवं प्रबंध संचालक नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट कम्पनी लिमिटेड श्री आई.सी.पी. केशरी ने कहा कि वर्तमान दौर में कोविड की चुनौती का सामना सम्पूर्ण विश्व कर रहा है। इसका प्रभाव भारत वर्ष पर भी है। इस चुनौतीपूर्ण समय में देश और प्रदेश दोनों की सशक्त तरीकों से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में गत 5-6 वर्षों में अधोसंरचना सहित अन्य सेक्टर में लगभग 5 लाख करोड़ से अधिक निवेश हुआ है। इसको और आगे ले जाने का रोडमेप प्रदेश में तैयार किया गया है। कॉनक्लेव में अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री मलय श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग श्री नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास श्री नीतेश व्यास सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने विचार व्यक्त किए। कॉनक्लेव के प्रारंभ में सी.आई.आई. मध्यप्रदेश के अध्यक्ष श्री अनुराग श्रीवास्तव ने कॉनक्लेव के रूपरेखा और उद्येश्यों पर प्रकाश डाला। कॉनक्लेव में वर्चुअल सम्मिलित हो रहे उद्योग प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार और सुझाव दिए।

टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये