जीवाजी यूनिवर्सिटी में कॉमर्स और मैनेजमेंट के लिए चाणक्य अकादमी


ग्वालियर। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री श्री मोहन यादव ने जीवाजी विश्वविद्यालय के चाणक्य अकादमी भवन का किया लोकार्पण । सात करोड़ रूपए की लागत से बने इस भवन में कॉमर्स एवं मैनेजमेंट की क्लासें लगाई जायेंगीं। इसके साथ ही चार ऑडिटोरियम सहित आधुनिक क्लासरूम भी निर्मित किए गए हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री श्री भारत सिंह कुशवाह ने की। विशेष अतिथि के रूप में क्षेत्रीय सांसद श्री विवेक नारायण शेजवलकर उपस्थित थे।
उच्च शिक्षा मंत्री श्री मोहन यादव ने भवन के लोकार्पण के उपरांत सम्पूर्ण परिसर का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा सुंदर भवन तैयार किया गया है। इसमें कॉमर्स एण्ड मैनेजमेंट के विद्यार्थियों को बेहतर सुविधायें उपलब्ध होंगीं। यह भवन 7 करोड़ रूपए की लागत से तीन ब्लॉक में बनाया गया है। जिसमें 16 हॉल, 28 कमरे और 17 स्टेयिंग रूम हैं। 6 हजार वर्गफुट में निर्मित इस भवन में 4 ऑटिडोरियम भी बनाए गए हैं।
साइंस कॉलेज में स्मार्ट क्लासरूम एवं विवेकानंद हॉल
उच्च शिक्षा मंत्री श्री मोहन यादव ने जीवाजी विश्वविद्यालय के कार्यक्रम के पश्चात साइंस कॉलेज में आयोजित कार्यक्रमों में भी भाग लिया। उन्होंने साइंस कॉलेज में स्मार्ट क्लासरूम एवं विवेकानंद हॉल का लोकार्पण करने के साथ ही लैब का भी अवलोकन किया। साइंस कॉलेज के कार्यक्रम में क्षेत्रीय सांसद श्री विवेक नारायण शेजवलकर, ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री सतीश सिकरवार सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं कॉलेज के प्राचार्य व प्रोफेसरगण उपस्थित थे।
उच्च शिक्षा मंत्री श्री मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से सम्पूर्ण प्रदेश में मॉडल कॉलेज तैयार करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रोफेसरों की नई नियुक्ति के संबंध में भी सरकार तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जन भागीदारी समितियों को और सशक्त बनाने की‍ दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। उच्च शिक्षा मंत्री श्री यादव ने बताया कि सरकार द्वारा विद्यार्थियों को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हो, इसके लिये कॉलेजों में एक-एक प्रोफेसर को बच्चों के प्लेसमेंट के लिये प्रभारी बनाया जा रहा है। प्रभारी प्रोफेसर विद्यार्थियों को बेहतर प्लेसमेंट कैसे मिले, इस दिशा में कार्य करेंगे। इस मौके पर जीवाजी विश्वविद्यालय परिसर में अतिथिगणों द्वारा वृक्षारोपण भी किया गया।
जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. एस के शुक्ला, कुलसचिव प्रो. आनंद मिश्रा, कार्यपरिषद सदस्य श्री अनूप अग्रवाल, डॉ. मनेन्द्र सोलंकी, श्री वीरेन्द्र गुर्जर, श्री शिवेन्द्र सिंह राठौर एवं साइंस कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व अध्यक्ष बीज विकास निगम श्री महेन्द्र यादव, साइंस कॉलेज के प्राचार्य श्री बी पी एस चौहान सहित जनप्रतिनिधिगण एवं प्रोफेसरगण उपस्थित थे।

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये