उत्तर भारत के ज्यादातर इलाकों में मौसम सूखा रहा

नयी दिल्ली । मुंबई में शनिवार को इस सीजन का सबसे कम न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया और हिमाचल प्रदेश के केलोंग में हुई बर्फबारी को छोड़कर उत्तर भारत के ज्यादातर हिस्सों में मौसम शुष्क रहा। दक्षिण में तमिलनाडु में बारिश जारी रही और इसके साथ ही मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने 11 मंत्रियों को ‘बुरेवी’ चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के लिए भेजा। मुंबई में सीजन का सबसे कम न्यूनतम तापमान 18.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और महाराष्ट्र में कई स्थानों पर तापमान में गिरावट देखी गई। दिल्ली में हवा की गति मंद होने से वायु गुणवत्ता “गंभीर” श्रेणी में दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 401 दर्ज किया गया। हवा की गति बढ़ने के साथ ही सोमवार को इसमें सुधार की उम्मीद है। मौसम विभाग के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी का न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस रहा और अधिकतम तापमान 27.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिलों के केलोंग में ताजा बर्फबारी हुई और 3.5 डिग्री सेल्सियस के साथ यह राज्य का सबसे ठंडा स्थान रहा। मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश के मध्यम और ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में सोमवार और बुधवार के बीच बारिश और बर्फबारी होने का अंदेशा जताया है। इसके साथ ही मैदानी इलाकों में मंगलवार को बारिश हो सकती है। कश्मीर के ज्यादातर स्थानों में रात का तापमान जमाव बिंदु से ऊपर दर्ज किया गया। गुलमर्ग में तापमान शून्य से 3.8 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया जो कि घाटी में सबसे ठंडा स्थान रहा। हरियाणा और पंजाब में न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया और चंडीगढ़ में यह 10.6 डिग्री सेल्सियस रहा जो कि सामान्य से तीन डिग्री ज्यादा था। उत्तर प्रदेश में मौसम सूखा रहा और राज्य के पूर्वी क्षेत्रों के कुछ इलाकों में घने से बहुत घना कोहरा रहा। मौसम विभाग के अनुसार सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान झांसी में 32.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और सबसे कम न्यूनतम तापमान फतेहगढ़ में 6.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजस्थान में माउंट आबू सबसे ठंडा स्थान रहा जहां न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये