किसानों के भारत बंद को कई राजनीतिक दलों का समर्थन

नयी दिल्ली/कोलकाता/चेन्नई। कई विपक्षी दलों ने केंद्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों द्वारा आठ दिसम्बर को बुलाये गये ‘भारत बंद’ को अपना समर्थन देने की शनिवार को घोषणा की और आंदोलनकारी किसानों के साथ एकजुटता दिखाते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन किया। किसान पिछले 10 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। इस बीच, सरकार और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच शनिवार को पांचवें दौर की बातचीत भी बेनतीजा रहने के बाद अखिल भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष प्रेम सिंह भंगू ने कहा, '' आठ दिसंबर को जोरदार तरीके से भारत बंद होगा।'' बैठक के बाद बीकेयू एकता (उगराहां) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘सरकार ने कानूनों में कई संशोधनों की पेशकश की है लेकिन हम चाहते हैं कि कानूनों को पूरी तरह निरस्त किया जाए।’’ वहीं, राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों के अलावा कई केंद्रीय मजदूर संगठनों ने किसानों के ‘भारत बंद’ के आह्वान को समर्थन देने का निर्णय लिया है। तमिलनाडु में किए गए विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व द्रमुक नेता एम के स्टालिन ने किया। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह किसानों के धैर्य की परीक्षा नहीं लें। पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ''आठ दिसंबर भारत बंद'' के हैशटेग के साथ ट्वीट किया, '' कलम उठाइए, अन्नदाता से माफी मांगिए और काले कानूनों को तत्काल रद्द कीजिए।'' उधर, पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों द्वारा आठ दिसम्बर को बुलाये गये ‘भारत बंद’ को अपना ‘‘नैतिक समर्थन’’ देने का फैसला किया है। साथ ही पार्टी ने किसानों के साथ एकजुटता जाहिर करते हुए तीन दिनों के लिए विभिन्न क्षेत्रों में विरोध-कार्यक्रम आयोजित करेगी। तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बंगाल में अपने विरोध कार्यक्रमों के दौरान उनकी पार्टी कृषि कानूनों को तुरंत वापस लेने की मांग करेगी। पार्टी की मांग है कि सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद नये विधेयकों को संसद की स्थायी समिति या प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए। बंदोपाध्याय ने कहा, ‘‘हमारी नेता मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किसानों के आंदोलन को पूरा समर्थन देने का वादा किया है। कल, उन्होंने एकजुटता में सड़क पर विरोध प्रदर्शन के लिए तीन दिन के न्यूनतम कार्यक्रम की घोषणा की। हम तत्काल कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हैं।’’ माकपा और भाकपा समेत अन्य वाम दलों ने भी एक संयुक्त बयान जारी कर किसानों के भारत बंद का पूर्ण समर्थन करने की घोषणा की। इस बीच, किसानों को अपना समर्थन देते हुए द्रमुक ने शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया कि वह उनके साथ वार्ता करें और तीनों कानूनों को वापस लें। द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने किसानों को अपना समर्थन देते हुए तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन किया। इस दौरान, अपने संबोधन में स्टालिन ने कहा कि किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आश्वासन के अभाव समेत कई अन्य मांगों को लेकर कानून का विरोध कर रहे हैं। स्टालिन ने कहा, “दलालों को हटाने के नाम पर यह कानून किसानों को उन बड़े कारोबारियों, बहुराष्ट्रीय निर्यातकों और संस्थाओं के गुलाम बना देंगे जिनके पास बड़े गोदाम हैं।” स्टालिन ने पूछा कि कोविड-19 महामारी के दौरान इन कानूनों को पारित कराने की “हड़बड़ी” क्या थी? उन्होंने जानना चाहा कि क्या इस कानून में कृषि कर्ज, खाद सब्सिडी और खेतिहर मजदूरों के लिये न्यूनतम रोजगार गारंटी का प्रावधान है। उन्होंने कहा, “इनमें से एक भी नहीं है। इसलिये किसान इसका विरोध कर रहे हैं और हम भी।” स्टालिन ने कहा, “जब तक तीनों कानून वापस नहीं ले लिये जाते, प्रदर्शन जारी रहना चाहिए। प्रधानमंत्री को किसानों को आमंत्रित कर उनसे बातचीत करनी चाहिए।” वहीं, पटना में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों ने शनिवार को यहां नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन किया और कानूनों की वापसी के लिए आंदोलन कर रहे किसानों को समर्थन देने का संकल्प लिया। धरना स्थल पर कांग्रेस और वाम दलों के साथ प्रदर्शन कर रहे राजद नेता ने किसान संगठनों की ओर से आठ दिसंबर को बुलाए गए बंद का समर्थन किया। जिला प्रशासन ने तेजस्वी और अन्य नेताओं को गांधी मैदान में गांधी प्रतिमा के सामने धरना की अनुमति नहीं दी थी। उसके बाद उन्होंने मैदान के बाहर धरना प्रदर्शन किया। बाद में, प्रशासन ने तेजस्वी यादव, राजद के बिहार अध्यक्ष जगदानंद सिंह, पूर्व मंत्री श्याम रजक, कांग्रेस नेता मदन मोहन झा और अजीत शर्मा तथा वामदलों के कुछ नेताओं को अंदर जाकर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने की अनुमति दी। तेजस्वी ने ट्वीट किया, “धनदाता के विरुद्ध अन्नदाता की लड़ाई में, मैं उनके साथ खड़ा हूं। क्या नए कानूनों में न्यूनतम समर्थन मूल्य के प्रावधान की मांग करने वाले किसानों के समर्थन में आवाज उठाना गुनाह है। यदि यह गुनाह है तो हम हमेशा यह गुनाह करेंगे।”

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये