खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार संकल्पित : खेल मंत्री श्रीमती सिंधिया

भोपाल। भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) द्वारा खेलों के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान करने वाली खेल हस्तियों को इंडिया स्पोर्टस अवार्ड-2020 प्रदान किए गए। खेलों के क्षेत्र में प्रदेश मे किए जा रहे अभूतपूर्व विकास और खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई जा रही अंतर्राष्ट्रीय खेल सुविधाओं के लिए मध्य प्रदेश को ‘‘बेस्ट स्टेट प्रमोटिंग स्पोर्टस अवार्ड’’ से नवाजा गया है। फिक्की द्वारा आयोजित ऑन लाईन वर्चुवल अवार्ड समारोह में  यह अवार्ड प्रदेश की खेल और युवा कल्याण मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया को प्रदान किया गया। खेल मंत्री ने मध्य प्रदेश को ‘‘बेस्ट स्टेट प्रमोटिंग स्पोर्टस अवार्ड’’ से सम्मानित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए संकल्पित है। उन्होंने इस अवॉर्ड के लिए फिक्की का आभार व्यक्त किया।  इस अवसर पर प्रमुख सचिव खेल श्री पंकज राग, संचालक खेल और युवा कल्याण श्री पवन कुमार जैन, संयुक्त संचालक डॉ. विनोद प्रधान एवं श्री बी एस यादव सहित अन्य खेल अधिकारी भी उपस्थित थे।
संचालक खेल और युवा कल्याण श्री पवन कुमार जैन ने बताया कि  फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा (फिक्की) द्वारा मध्य प्रदेश को 'बेस्ट स्टेट प्रमोटिंग स्पोर्टस अवार्ड' से नवाजा गया है। खेल और युवा कल्याण मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया की खेलों में विशेष रूचि और उनके द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों के परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश खेलों के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। प्रदेश के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और अंतर्राष्ट्रीय खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसी का नतीजा है कि प्रदेश के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का परचम फहरा रहे हैं। एशियन खेलों में मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच पदक देश को दिलाए हैं। रियो ओलम्पिक में महिला हॉकी अकादमी की छह खिलाड़ियों ने भारतीय हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व किया। बीते राष्ट्रीय खेलों की पदक तालिका में मध्य प्रदेश ने आठवें से छठवें स्थान पर आकर राष्ट्रीय खेलों में कीर्तिमान स्थापित किया है।

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये