सिंधिया समर्थक राजपूत और सिलावट का मंत्री बनना तय, इमरती-गिर्राज को मिलेगी निगम मंडल में जिम्मेदारी

भोपाल। मप्र में उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी को मिली जोरदार जीत के बाद शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। इसबारे में कोई खुलकर नहीं बोल रहा, लेकिन पार्टी के अलग-अलग धड़ों के बीच संतुलन बनाने के लिए वरिष्ठ नेताओं के बीच मेल-मुलाकातों का दौर शुरू हो गया है। चुनावी जीत के बाद भी सीएम शिवराज के लिए चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। पार्टी के पुराने नेताओं को संतुष्ट करने के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों को क्या जिम्मेदारी दी जाए, इसको लेकर सरकार से लेकर संगठन तक में मौकों की तलाश हो रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दिल्ली प्रवास के दौरान सोमवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मिले। इसके अगले ही दिन मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से बंद कमरे में बातचीत की। इन मुलाकातों में क्या बात हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई, लेकिन सूत्रों के मुताबिक चुनाव में हारे हुए कुछ नेताओं को भी निगम-मंडलों में एडजस्ट करने की तैयारी हो रही है।
जानकारी के मुताबिक सिंधिया-समर्थक तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत का फिर से मंत्री बनना तय है। चुनाव प्रचार के दौरान सिलावट को मंत्री बनाने की घोषणा खुद मुख्यमंत्री ने की थी। वहीं, राजपूत ने सुरखी में जबरदस्त चुनौती के बाद भी कांग्रेस उम्मीदवार को बड़े अंतर से पटकनी दी थी। शिवराज कैबिनेट में महिला एवं बाल विकास मंत्री रहीं इमरती देवी को उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन सिंधिया उनका कैबिनेट मंत्री का दर्जा बरकरार रखना चाहते हैं। ऐसे में इमरती देवी और गिरिराज दंडोतिया को निगम-मंडलों में महत्वपूर्ण पद मिल सकता है। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा जल्द ही अपनी कार्यसमिति का ऐलान करने वाले हैं। उम्मीद है कि मंत्री नहीं बनाए जाने वाले पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं को शर्मा की टीम में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। कुछ सिंधिया-समर्थक नेताओं को भी संगठन में जगह मिल सकती है, लेकिन इससे पहले उन्हें बीजेपी की कार्यशैली समझने के लिए ट्रेनिंग दी जा सकती है।

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये