मुख्यमंत्री ने कहा- निगम मंडलों की गतिविधियों को भी गति दें मंत्रीगण

18 दिसम्बर को किसानों को वितरित होंगे 1600 करोड़ रुपये
भोपाल।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मंत्रीगण अपने विभाग से जुड़े निगम मंडल की गतिविधियों को भी गति प्रदान करें। आम जन के हित में योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन किया जाए। विभाग के कार्यों पर निरंतर नजर रखें। पूरे परिश्रम से दिन-रात कार्य कर आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का लक्ष्य पूर्ण करना है। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय से वीडियो कांफ्रेंस द्वारा मंत्री परिषद सदस्यों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने केबिनेट बैठक के पहले मंत्रियों से कहा कि वे अपने भ्रमण, जनता से संवाद, बैठकों और कार्यक्रमों में नये कृषि कानूनों के फायदों के बारे में चर्चा करें। किसानों के साथ ही सभी वर्गों को देश की आर्थिक प्रगति की दिशा नये कृषि कानूनों के माध्यम से उठाए गए महत्वपूर्ण कदम की जानकारी दी जाए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने होशंगाबाद जिले में किसानों को धान का उच्चतम मूल्य दिलवाने के लिए नए किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) अनुबंध मूल्य आश्वासन और सेवा अधिनियम 2020 में की गई कार्यवाही को आदर्श बताते हुए अन्य जिलों में भी किसान हित में ऐसे कदम उठाने की अपेक्षा की। किसानों की आर्थिक दशा सुधारने के लिए बने इन कानूनों के प्रावधानों का विवरण भी जनता तक पहुंचाया जाए। इसके लिए मंत्री नेतृत्व करते हुए इस कार्य को पूर्ण करें।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि आगामी 18 दिसम्बर को पूरे राज्य में किसानों को राहत राशि उनके खातों में अंतरित की जाएगी। इसमें पूर्व की बकाया राशि के अलावा इस वर्ष सोयाबीन फसलों के नुकसान और अन्य फसल क्षति की राहत राशि भी शामिल रहेगी। प्रदेश के 35 लाख 50 हजार किसानों के खातों में 1600 करोड़ रुपये जमा भी किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि वे स्वयं विदिशा में राशि अंतरित करेंगे। शेष जिलों में मंत्रीगण इन कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मंत्रियों के जिलों में जाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय और कृषि मंत्री समन्वय कर निर्णय ले रहे हैं। इस कार्यक्रम ने स्थानीय विधायक और सांसद भी शामिल होकर अपनी बात कहेंगे।

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ग्वालियर:- स्मार्ट सिटी के द्वारा विकसित किये जा रहे डिजीटल म्यूजियम और प्लेनेटोरियम का काम अंतिम चरण में है, और जल्द ही इसके पूर्ण होने पर एक बडी सौगात ग्वालियर शहर को मिल सकेगी। यह बात स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में पत्रकारो से हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह ने कही। आज पत्रकारो से इस अनौपचारिक चर्चा का उद्देश्य डिजीटल म्यूजियम के बारे में जानकारी साझा कर महत्वपूर्ण सुझाव लेना था। ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि इस डिजीटल संग्रहालय में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों बुद्धिजीवी, पत्रकार इतिहासकार सहीत समाज के विभिन्न वर्गो से राय और सुझाव लिये जा रहे है। ताकि शहर में बनने वाले डिजीटल म्यूजियम को भव्यता प्रदान की जा सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि इस संग्रहालय में ग्वालियर की स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया जायेगा। ताकि लुप्त हो रही इन कलाओ को पुर्नजीवित किया जा सके। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे। श्रीमती सिंह नें चर्चा के दौरान जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कला, संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। श्रीमती सिंह नें सभी से अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला-संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल करने के साथ साथ स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जा सके। ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके। श्रीमती सिंह नें जानकारी देते हुये बताया कि विभिन्न प्रमोशन औऱ प्रतियोगिताओ के द्वारा भी स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारो स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है ताकि वह इस संग्रहालय में अपनी अपनी भागीदारी दे सके। गौलतलब है कि इस भवन के पीछे के भाग में एक तारामंडल भी विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र को ग्वालियर के पर्यटन मानचित्र में एक अहम बिंदु के रूप में माना जा रहा है। ग्वालियर व बुंदेलखंड संभाग में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा तथा स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने भी भूमिका निभाएगा। डिजीटल संग्रहालय और प्लेनेटोरियम प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7 करोड रुपये है और इसे 3500 वर्गफीट एरिया में तैयार किया जा रहा है। श्रीमती सिंह ने स्मार्ट सिटी की अन्य परियोजनाओ की जानकारी देते हुये बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा कई महत्वपूर्ण परियोजनाये जिनमें डिजीटल सेट्रल लाईब्रेरी, स्मार्ट वाँश रुम कैफे, प्लेग्राउंड, वेस्ट टू आर्ट, सेल्फी पाँइट सहीत ऐसी कई परियोजनाये अपने अंतिम चरण में है जिनके पूर्ण होने पर शहर में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिलेगा। वही उन्होने शहर के सभी वर्गो से अपील करते हुये कहाँ कि विकास के लिये प्रशासनिक व्यवस्था का दायित्व जितना महत्वपूर्ण है उतना ही समाज के हर वर्ग का भी योगदान रहता है दोनो के संयुक्त प्रयास और समन्वयन से ही विकास संभव हो पाता है। स्मार्ट सिटी का पूरा प्रयास रहेगा कि विकास के लिये सभी विभागो के साथ बेहतर तालमेल बनाकर समन्वय के साथ कार्य किया जाये