9 राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक दर्जा देने के लिए सुप्रीम गुहार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं को 9 राज्य में अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई एक हफ्ते के लिए टाल दी है। याचिका में इससे संबंधित तमाम केसो को सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर करने की गुहार लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर गुहार लगाई गई है कि नैशनल कमिशन फॉर माइनॉरिटी ऐक्ट के उस प्रावधान को खत्म किया जाए जिसके तहत देश में अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाता है। साथ ही गुहार लगाई गई है कि अगर कानून कायम रखा जाता है तो जिन 9 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हैं उन्हें राज्यवार स्तर पर अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाए ताकि उन्हें अल्पसंख्यक का लाभ मिले। सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर नैशनल कमिशन फॉर माइनॉरिटी ऐक्ट 1992 के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिकाएं जो तमाम राज्यों के हाई कोर्ट में पेंडिंग हैं उन्हें सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की गुहार लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई एक हफ्ते के लिए टाल दी है और याचिकाकर्ता से कहा है कि इस दौरान प्रतिवादियों के नाम पूरा कर पेश करें।
बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दाखिल अर्जी में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने माइनॉरिटी एक्ट की धारा-2 (सी) के तहत मुस्लिम, क्रिश्चियन, सिख, बौद्ध और जैन को अल्पसंख्यक घोषित किया है लेकिन उसने यहूदी बहाई को अल्पसंख्यक घोषित नहीं किया गया। साथ ही कहा गया है कि देश के 9 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हैं लेकिन उन्हें अल्पसंख्यक का लाभ नहीं मिल रहा है। याचिका में कहा गया कि लद्दाख, मिजोरम, लक्ष्यद्वीप, कश्मीर, नागालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, पंजाब और मणिपुर में हिंदू की जनसंख्या अल्पसंख्यक तौर पर है। याची ने कहा कि इन राज्यों में अल्पसंख्यक होने के कारण हिंदुओं को अल्पसंख्यक का लाभ मिलना चाहिए लेकिन उनका लाभ उन राज्यों के बहुसंख्यक को दिया जा रहा है।

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