पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा ने कहा- किसान आंदोलन का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाना चाहिए

नयी दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने बृहस्पतिवार को कहा कि किसानों के आंदोलन स्थलों को सीमेंट की दीवारों और लोहे के तारों से घेरने से समाधान नहीं निकलेगा बल्कि सरकार को आंदोलनरत किसानों के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में चर्चा करनी चाहिए और जल्द से जल्द समाधान निकालना चाहिए। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए देवगौड़ा ने कहा कि 26 जनवरी को दिल्ली में लालकिले पर हुई घटना के लिए किसानों को सजा नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उस दिन हुई हिंसा को कुछ अराजक तत्वों ने अंजाम दिया जिन्हें इसके लिए कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा को कुछ अराजक तत्वों ने अंजाम दिया। किसानों को इसके लिए सजा नहीं जा सकती। जो हुआ, उसकी पूरे देश और सभी राजनीतिक दलों ने निंदा की है। उन्होंने (अराजक तत्वों ने) अपने कृत्य से राष्ट्र का अनादर किया है। इसमें कोई विवाद नहीं है। इस घटना को अंजाम देने वालों को सजा देनी होगी। लेकिन किसानों के मुद्दे को इस घटनाक्रम से पूरी तरह अलग रख जाना चाहिए। ’’ पूर्व प्रधानमंत्री ने किसानों को राष्ट्र की रीढ़ बताते हुए कहा कि उनकी समस्याओं को सुना जाना चाहिए और एक स्वीकार्य समाधान निकाला जाना चाहिए। देवेगौड़ा ने कहा कि एक किसान होने के नाते उन्होंने उनसे जुड़े विषयों को लेकर कई मौकों पर किसानों से संवाद किया है और वह चाहते हैं कि इस मामले का ‘‘शांतिपूर्ण’’ समाधान निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘पत्थर की दीवारें खड़ी कर देने से समाधान नहीं निकलेगा। इसके लिए एक सौहार्दपूर्ण वातावरण होना चाहिए। मैं अपनी जिंदगी के अंतिम चरण में हूं। इस मामले का शांतिपूर्ण समाधान होना चाहिए।’’ पूर्व प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि किसानों के साथ चर्चा में सदन के कुछ वरिष्ठ सदस्यों को भी शामिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘हम भी किसानों को कुछ सुझाव दे सकते हैं।’’ उन्होंने कहा कि सरकार सोचती है कि इन तीन कानूनों से बिचौलिये खत्म हो जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘किसान शिक्षित नहीं है। लेकिन इन तीनों कानूनों से बिचौलियों को नजरअंदाज करना भी आसान नहीं है ।’’ देवेगौड़ा ने कहा कि जिस दिन तीन कानूनों को इस सदन से पारित किया गया उस दिन उपयुक्त प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘कृषि राज्य का विषय है। सरकार को राज्यों से भी राय लेनी चाहिए थी।’’ पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने किसानों के हितों के संरक्षण के लिए कई कदम उठाए हैं और उसे लगता है कि इन तीन कानूनों से उनकी सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे हिसाब से बहुत मुश्किल है। सभी पूर्ववर्ती सरकारों ने किसानों की स्थिति सुधारने की कोशिश की। लेकिन किसान परेशान रहे। शहरों की तरफ उनका पलायन होने लगा। वह लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका जो करना चाहिए था।’’ उन्होंने कहा ‘‘किसान अन्नदाता हैं। उनकी तमाम परेशानियां हैं जिन्हें दूर किया जाना जरूरी है। इसमें विलंब नहीं होना चाहिए।’’ अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन दिनों सरकार ने कृषि उपकरणों में रियायत देने का फैसला किया था जिसका कि सबसे अधिक फायदा पंजाब के किसानों को मिला।

 

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