केंद्रीय क्रषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा- खून से खेती करती है कांग्रेस, संसद में हुआ हंगामा

नई दिल्‍ली। संसद के बजट सत्र 2021 का आज छठा दिन है। राष्‍ट्रपति के अभिभाषण और नए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन को लेकर राज्‍यसभा में चर्चा हुई। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कानूनों पर उठे सवालों का जवाब देते हुए कांग्रेस समेत विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसानों को बरगलाया गया और सिर्फ एक राज्य (पंजाब) के किसान गलतफहमी के शिकार हैं। कानूनों को काला कहा जाता है, लेकिन मैं हर बैठक में पूछता रहा कि इसमें क्या काला है, किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्‍होंने कहा कि सरकार नये कृषि कानूनों में किसी भी संशोधन को तैयार है। इसके ये मायने नहीं है कि कानून में किसी भी प्रकार की गलती है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि 15वें वित्‍त आयोग ने ग्राम पंचायतों के लिए 2.36 लाख करोड़ रुपये देने की सिफारिश की थी, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दी। उन्‍होंने कहा, "ग्रामीण इलाकों में स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं के लिए करीब 43,000 करोड़ रुपये स्‍वीकृत किए गए हैं। 5 साल में ग्राम पंचायतों में 2.8 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।" उन्‍होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार गांव, गरीब और किसान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आने वाले कल में भी रहेगी।" तोमर ने कहा कि 'मनरेगा की शुरुआत यूपीए सरकार ने की लेकिन उसे रोजगार देने के साथ बहुआयामी हमारी सरकार ने बनाया।' तोमर ने कहा, "कई बार विपक्ष की तरफ से ये बात सामने आती है कि आप कहते हैं कि सब मोदी जी की सरकार ने किया है पिछली सरकारों ने तो कुछ भी नहीं किया। मैं इस मामले में ये कहना चाहता हूं कि इस प्रकार का आरोप लगाना उचित नहीं है।"
तोमर ने कहा, "हमने एक के बाद एक उनको प्रस्‍ताव देने का भी प्रयत्‍न किया। लेकिन मैंने साथ में यह भी कहा कि अगर भारत सरकार किसी भी संशोधन के लिए तैयार है, इसके मायने यह नहीं लगाना चाहिए कि किसान कानून में कोई गलती है। लेकिन किसान आंदोलन पर है। पूरे एक राज्‍य में गलतफहमी का शिकार हैं लोग। किसानों को इस बात के लिए बरगलाया गया है कि ये कानून आपकी जमीन को ले जाएंगे। मैं कहता हूं कि कॉन्‍ट्रैक्‍ट फार्मिंग के ऐक्‍ट में कोई एक प्रावधान बताए। दुनिया जानती है पानी से खेती होती है, खून से खेती सिर्फ कांग्रेस ही कर सकती है। भारतीय जनता पार्टी खून से खेती नहीं कर सकती।" इस टिप्‍पणी पर कांग्रेस के सदस्‍यों ने हंगामा शुरू कर दिया।
कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा, "मैं 194 किसानों को श्रद्धांजलि पेश करना चाहता हूं जिन्‍होंने आंदोलन में अपने प्राण दिए हैं। हम अपनी सहानुभूति दिल्ली पुलिस के उन जवानों के प्रति जताते हैं जो 26 जनवरी को हुई घटना में घायल हुए।" शर्मा ने कहा, "लाल किले में जो कुछ भी हुआ, उसकी जांच होनी चाहिए।" कांग्रेस के सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाबी में अपनी बात रखी। उन्‍होंने किसान आंदोलन पर बेहद आक्रामक लहजे में सत्‍ता पक्ष को घेरते हुए कहा कि दिल्‍ली में किसानों को रोकने के लिए जैसे इंतजाम हैं, वैसे तो दूसरे देशों में तानाशाह करते आए हैं। बाजवा ने कहा, "प्रधानमंत्री जी, आपकी कांग्रेस से अदावत हो सकती है, विपक्ष से अदावत हो सकती है लेकिन किसानों से क्‍या अदावत है? आपके पास मौका है क‍ि स्‍टेट्समैन बनने का। आपके पास मौका है सरदार पटेल वाली जगह लेने का। वो भी गुजरात के बेटे थे। आओ चलो, मैं आपके साथ चलता हूं। चलो सिंघु बॉर्डर।"

 

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